संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। सेक्टर-13 वृंदा एनक्लेव स्थित भागवत पार्क-तीन में श्रीमद्भागवत कथामृत का मंगलवार को दूसरा दिन रहा। सुबह आठ बजे पितृ गायत्री हवन किया और फिर दोपहर तीन बजे अवध धाम वृंदावन से आए राधे-राधे महाराज ने कथा सुनाई। कथा का आयोजन वृंदा एनक्लेव परिवार द्वारा किया जा रहा है।
पवन रेवड़ी ने बताया कि यह वृंदा एनक्लेव परिवार द्वारा तीसरी बार श्रीमद्भागवत कथामृत करवाई जा रही है। मंगलवार को कथा के दूसरे दिन राधे-राधे महाराज ने कुंती स्तुति व शुकदेव के आगमन के बारे में बताया। कुंती स्तुति महाभारत के समय की है। जब श्रीकृष्ण द्वारिका लौट रहे होते हैं और कुंती अपने परिवार के साथ उनसे मिलने जाती हैं। कुंती श्रीकृष्ण की स्तुति करते हुए कहती है कि हे आदिपुरुष आप सृष्टि के मूल कारण हैं और प्रकृति से परे ईश्वर है। वह श्रीकृष्ण से दुखों को ही वरदान के रूप में मांगती है क्योंकि उनका मानना है कि जब जीवन में दुख होता है तो मनुष्य भगवान को याद करता है जबकि सुख में मन भक्ति से भटक जाता है।
उनका लक्ष्य श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहना था। राजा परीक्षित को कौंच सर्प से डंक मारने का श्राप मिला था। शुकदेव मुनि भागवत कथा कहने के लिए प्रकट हुए। वह परीक्षित को जीवन के अंतिम क्षणों में भागवत पुराण की कथा सुनाते हैं। शुकदेव का आगमन परीक्षित को मोक्ष दिलाने और भागवत कथा के माध्यम से जीवन और मृत्यु के रहस्य को समझाने के लिए था। शुकदेव द्वारा सुनाई गई भागवत कथा परीक्षित के लिए महत्वपूर्ण थी जिसने उन्हें आत्म-ज्ञान प्राप्त करने और मोक्ष की ओर अग्रसर होने में मदद की। कुंती स्तुति व शुकदेव आगमन को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हुए। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर अश्वनी सर्राफ, ईश्वर कश्यप, यशपाल शर्मा, शिव कुमार व प्रमोद शर्मा उपस्थित रहे।