पानीपत। उपायुक्त ने जिला परिषद की अध्यक्ष काजल देशवाल के जाति प्रमाण पत्र बदलकर चुनाव लड़ने के आरोपों की जांच रिपोर्ट को जांच अधिकारी एडीसी को लौटा दिया है। एडीसी से सहारपुर डीएम की भेजी रिपोर्ट को सीधे ही डीसी को भेज दिया। डीसी ने कहा कि इसमें एडीसी को बतौर जांच अधिकारी अपनी रिपोर्ट देनी चाहिए।
इसमें कार्रवाई के बारे में भी अपनी अनुशंसा देनी चाहिए। इसके आधार पर पंचायती राज विभाग के निदेशक को रिपोर्ट दी जाएगी। जिला परिषद अध्यक्ष काजल देशवाल की सदस्यता का फैसला निदेशक लेंगे। वहीं काजल देशवाल और उनके पति बचाव के लिए लगातार हाथ पैर मार रहे हैं।
जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष ज्योति शर्मा के पति प्रदीप ने शिकायत में आरोप लगाया था कि जिला परिषद अध्यक्ष काजल देशवाल का चुनाव में नामांकन के समय लगाया जाति प्रमाण पत्र फर्जी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पंचायत विभाग के निदेशक ने इसकी जांच के आदेश दिए थे। निदेशक ने उपायुक्त और उपायुक्त ने इसकी जांच अतिरिक्त उपायुक्त को सौंपी थी। अतिरिक्त उपायुक्त ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के डीएम को पत्र लिखकर काजल देशवाल के मायका की रिपोर्ट मांगी थी।
सहारनपुर डीएम ने काजल देशवाल के सामान्य जाति के होने की रिपोर्ट एडीसी को दी थी। इस बीच काजल देशवाल ने सहारनपुर डीएम को दोबारा जांच कराने की मांग की थी। उनकी दोबारा जांच कराई।
जिसमें सहारनपुर के धुन्ना गांव से उनके पिता व भाई की शिक्षा संबंधित रिकाॅर्ड की भी जांच कराई। गांव के राजकीय स्कूल से 1956 से 1963 तक रिकॉर्ड जांचा तो काजल देशवाल के पिता नरेश हिंदू राजपूत मिले। जबकि यह आरक्षित वर्ग में नहीं आती। डीएम ने इसकी रिपोर्ट एडीसी पानीपत को मेल के माध्यम दी।
एडीसी ने यह रिपोर्ट डीसी को भेज दी। डीसी ने 80 पेज की रिपोर्ट में एडीसी की जांच रिपोर्ट नहीं मिली। उन्होंने बुधवार को जांच रिपोर्ट वापस कर दी।