पानीपत। डीसी वीरेंद्र दहिया शनिवार दोपहर करीब एक बजे सामान्य व्यक्ति की तरह सिविल अस्पताल में आंख का इलाज कराने पहुंच गए। उन्होंने अपनी गाड़ी और गनमैन अस्पताल के बाहर ही छोड़ दिया। डीसी ने अस्पताल का सच जानने के लिए खिड़की पर पांच रुपये देकर खुद पर्ची बनवाई और डॉक्टर के बाहर लाइन में खड़े हो गए। इसी दौरान अस्पताल के एक गार्ड ने उन्हें पहचान लिया। इसके बाद दूसरे डॉक्टर दौड़कर अपने-अपने केबिन में पहुंच गए। यहां डॉक्टर ने आंख की जांच कर दवा लिखी। यह दवा और आई ड्रॉप सिविल अस्पताल में नहीं मिला। डॉक्टर ने बाहर से दवा मंगाई। डीसी ने डॉक्टर को दवाओं की डिमांड भेजने का निर्देश दिया। डीसी ने 15 मिनट तक डॉक्टरों से अस्पताल की व्यवस्था के बारे में भी बातचीत की।
डीसी वीरेंद्र दहिया ने मास्क लगाकर नेत्र रोग विशेषज्ञ से मरीजों वाले स्टूल पर बैठकर जांच कराई। जांच के बाद भी डीसी स्टूल पर बैठकर डॉक्टरों से बात करते रहे। डॉक्टर डीसी के सम्मान में खड़े हो गए और बोले कि सर आप कुर्सी पर आ जाइए। डीसी ने कहा कि मैं डीसी नहीं मरीज बनकर आया हूं, डॉक्टर साहब आप अपनी कुर्सी पर बैठिए। कुछ देर बाद डीसी वापस चले गए।
डेंगू व चिकनगुनिया की जांच के नाम पर निजी अस्पतालों की मनमानी रोकने के लिए पहले ही इनकी जांच के रेट तय कर दिए हैं। डेंगू व चिकनगुनिया सीरोलॉजी जांच छह सौ रुपये और आरटी-पीसीआर चिकनगुनिया जांच के एक हजार रुपये फीस निर्धारित की गई है। डीसी वीरेंद्र कुमार दहिया ने जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सभी अस्पतालों व लैब संचालकों को पत्र जारी करने के आदेश दिए हैं। इसकी अनदेखी करने पर अस्पतालों और लैबों की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।