फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panipat News: नागरिक अस्पताल से निजी अस्पतालों में पहुंच रहा मरीजों का डाटा, जांच शुरू

विज्ञापन
विज्ञापन
पानीपत। निजी अस्पतालों के पास जिला अस्पताल में दाखिल मरीजों को रिकॉर्ड पहुंच रहा है। फिर यहां से मरीज वहां भेजे गए हैं। इस संबंध में शिकायत भी मिली है। अस्पताल का स्टाफ व्हाट्सएप से ये रिपोर्ट लीक कर रहा है। इसलिए जिला नागरिक अस्पताल से रेफर होने वाले हर मरीज की ट्रेकिंग शुरू हो गई है।
विज्ञापन

उल्लेखनीय है कि उपरोक्त स्थिति के मद्देनजर मरीज के परिजनों से स्वास्थ्य अधिकारी बातचीत कर रहे हैं। मरीजों की पूरी हिस्ट्री देखी जा रही है। मरीज को रेफर करने वाले डॉक्टर से लिखित में कारण जाना जा रहा है। इससे पहले इमरजेंसी वार्ड के लिए ही ये नियम थे। अब प्रसूति विभाग, एसएनसीयू वार्ड, नेत्र रोग विभाग, सर्जरी, ईएनटी, मनोरोग विभाग के लिए भी ये नियम लागू कर दिए गए हैं। मरीजों की ट्रेकिंग करने की जिम्मेदारी डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग को दी गई है। फिलहाल नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी से दो प्रतिशत व प्रसूति वार्ड से एक प्रतिशत रेफरल है। एसएनसीयू वार्ड में पिछले एक साल में रेफरल बढ़कर 10 प्रतिशत तक पहुंच गया था। मुख्यालय की ओर से सिविल सर्जन को इसे कम करने के निर्देश दिए हैं। इसलिए ये सख्ती की जा रही है।
नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों पर कमीशन के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने के आरोप लगे हैं। जनवरी और फरवरी में एसएनसीयू वार्ड से 52 बच्चे रेफर हो गए तो ये शक और बढ़ गया था। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग को ये भी शिकायत मिली है कि नागरिक अस्पताल में दाखिल मरीजों की पूरी रिपोर्ट निजी अस्पतालों में पहुंच रही है। रिपोर्ट जानकर निजी अस्पतालों के एजेंट नागरिक अस्पताल में आकर मरीजों को बहकाकर अपने साथ ले जा रहे हैं। ऐसी कई शिकायतें मिली हैं। डिप्टी सिविल सर्जन इन मामलों की भी जांच कर रही हैं। वह नागरिक अस्पताल से मरीज ले जाने वाले सरकारी एंबुलेंस के चालक व एलटी से भी पूछताछ रही है। नागरिक अस्पताल में कमीशनखोरी का खेल खत्म करने के लिए ये कड़े कदम उठाए गए हैं।
विज्ञापन






वर्जन-
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग ने बताया कि नागरिक अस्पताल से जो भी मरीज रेफर होगा। डॉक्टर को लिखित में इसका कारण देना होगा। हर मरीज की ट्रेकिंग हो रही है। सरकारी अस्पताल में दाखिल मरीजों का रिकॉर्ड निजी अस्पतालों में कैसे पहुंच रहा है। इसकी भी जांच की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें