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अमर उजाला लाइव: 73 दिन बाद स्कूलों में लगीं कक्षाएं, महज 20 फीसदी विद्यार्थी ही पहुंचे

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कोरोना की दूसरी लहर से बने हालात सामान्य होने पर 73 दिन बार शुक्रवार को स्कूल खुले। हालांकि पहले दिन जिले के निजी और सरकारी स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक के महज 20 फीसदी विद्यार्थी ही पहुंचे। सुबह आठ बजे से विद्यार्थी स्कूल पहुंचना शुरू हो गए। पहली कक्षा साढ़े आठ बजे लगी। दोपहर 12 बजे तक कक्षाएं लगाकर छुट्टी हो गई। अध्यापक एवं अध्यापिकाओं की छुट्टी दोपहर साढ़े 12 बजे हुई।
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सभी स्कूलों में सेफ्टी टीम का गठन किया गया। जिसमें प्रधानाचार्य, दो से तीन शिक्षक, पीटीआई एवं एनएसएस के अध्यापक एवं अध्यापिकाएं शामिल रहीं। स्कूल में प्रवेश से लेकर छुट्टी तक का काम सेफ्टी टीम ने संभाला। स्कूल में प्रवेश के दौरान अभिभावकों के अनुपत्र देखे गए, जिन विद्यार्थियों के पास स्कूल में पढ़ाई के लिए अभिभावकों का अनुमति पत्र नहीं था, उन्हें लौटाया गया। बगैर मास्क के पहुंचे विद्यार्थियों को मास्क दिए गए और सैनिटाइजर का भी इंतजाम किया गया। कक्षाओं में सामाजिक दूरी का पालन किया गया और कक्षा में आने वाले हर विद्यार्थी की डेस्क तय कर दी गई, विद्यार्थी रोज उसी डेस्क पर बैठेगा।
कुछ स्कूलों में बिना मास्क के दिखे विद्यार्थी, कहीं सटकर बैठ गए
कुछ स्कूलों में विद्यार्थी बिना मास्क के प्रवेश करते और निकलते दिखे। वहीं कुछ स्कूलों में पहले दिन कक्षाओं में सामाजिक दूरी का पालन नहीं हो सका। विद्यार्थी एक दूसरे से सटकर बैठ गए और अध्यापक एवं अध्यापिकाएं विद्यार्थियों से सामाजिक दूरी का पालन कराते नजर आए।
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अभिभावकों का कहना
हम तो खुुश हैं कि बच्चे स्कूलों में जाकर पढ़ेंगे। ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए ठीक से पढ़ाई नहीं हो पाती थी, अब ठीक से पढ़ सकेंगे।
-सुनैना, अभिभावक
यदि सभी विद्यार्थी कोरोना की गाइडलाइन का पालन करें और मास्क पहनकर रखें तो सभी सुरक्षित तरीके से अच्छे से पढ़ सकेंगेे।
-राजवंती, अभिभावक
ऑनलाइन क्लास लगाने से कई घंटे तक बच्चों को स्क्रीन के आगे ही बैठना पड़ता है। कक्षाओं में जो पढ़ाई का माहौल होता है, वह भी नहीं मिल पाता है।
- जसबीर, अभिभावक
लगातार चार से पांच घंटे तक स्क्रीन के आगे पढ़ने आंखों पर जोर पढ़ता है, यह ठीक नहीं है। स्कूल में पढ़ाई भी बेहतर तरीके से हो सकेगी।
-सुरेश, अभिभावक
कक्षा में बैठकर पढ़ने से बच्चों को अच्छी तरह से विषय समझ में आएगा और वह अध्यापक से तुरंत ही सवाल भी पूछ सकेंगे, यह बेहतर है।
-गुलाब सिंह, अभिभावक
स्कूल की पढ़ाई की तुलना ऑनलाइन पढ़ाई से नहीं की जा सकती है। बच्चे भी पढ़ने को लेकर गंभीर नहीं दिखते हैं, अब ठीक से पढ़ाई हो सकेगी।
-नरेश, अभिभावक
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