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बड़ी मुश्किल से पहले कोरोना सीजन से निकले थे, अब फिर फंस गए दुकानदार, सरकार से लगा रहे गुहार

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कोरोना काल की वजह से लॉकडाउन के बाद भले ही अनलॉक में शहर के बाजारों को खोलने की अनुमति मिली हो, लेकिन दुकानदारों के दिलों में अभी भी दर्द बरकरार है। शहर में 60 प्रतिशत से ज्यादा दुकानदार किराए की दुुकानों पर बैठे हैं, केवल 40 प्रतिशत की ही अपनी दुकानें है। गर्मी के सीजन का माल पहले ही लोग ऑनलाइन मंगवा चुके हैं। शादियों को सीजन भी नहीं है। इससे दुकानदारी न चलने की वजह से आमदनी न होने और ऊपर से दुकानदारों के खर्चे ज्यों के त्यों रहने से दुकानदार परेशान हैँ।
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वहीं, दुकानदारों ने कई बार सरकार से भी आर्थिक सहायता देने या बिजली के बिल तक माफ करने की गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक सरकार की कोई ऐसी योजना नहीं आई है, जो इन दुकानदारों को राहत दे सके। जिला प्रशासन के ढीले रवैए से दुकानदार परेशान हैं। न बिजली है और न लाइट की सुविधा है। अपने खुले बाजार और दर्द बरकरार के अभियान के चलते अमर उजाला टीम ने मंगलवार को शहर के बाजार प्रतिनिधियों से बातचीत कर शहर के दुकानदारों के हालात जानें।
ढीला प्रशासन, दुख भोग रहे दुकानदार : हुरिया
बाजारों में अब दुकानदारी तो रही नहीं, लेकिन भीड़ पूरी रहती हे। बाजारों के प्रति पुलिस और निगम प्रशासन को रवैया बिल्कुल ढीला है। बाजार में सुरक्षा नाम की कोई चीज ही नहीं है। यहां तक की लाइटें तक निगम नहीं लगवा पाया है। अब खुद ही लाइटें लगवानी पड़ेंगी। एक पुलिस कर्मचारी तक की ड्यूटी बाजार में नहीं है। वहीं, नगर निगम भी अब बाजारों का रुख नहीं करता। इससे बाजार वालों को परेेशानी हो रही है।
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महेंद्र हुरिया, प्रधान, शाह मार्केट।
शादियां नहीं तो दुकानदारी नहीं : चुघ
कोरोना काल फिर लॉकडाउन, अब शादियों का सीजन भी नहीं है। बाजार में बहुत कम ग्राहक ही आते हैं। इसलिए दुकानदारों को खाली ही बैठे रहना पड़ता है। तकरीबन दुकानदार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। दुकानों का किराया तक नहीं निकल पा रहा है। कुछ दुकानदार तो ज्यादा परेशानी से गुजर रहे हैं। सरकार को दुकानदारों के लिए कोई योजना लानी चाहिए, ताकि वे इस कोरोना काल से उभर पाएं।
विपिन चुघ, प्रधान, क्लाथ मार्केट, पानीपत।
60 प्रतिशत लोग किराए की दुकानों पर हैं और काम बहुत है मंदा : भराड़ा
शहर के बाजारों में 60 प्रतिशत लोग किराए की दुकानों पर बैठे हैं। केवल 40 प्रतिशत लोगों की ही अपनी दुकानें हैं। बड़ी मुश्किल से पहले कोरोना काल से दुकानदार निकल पाए थे कि फिर से कोरोना और लॉकडाउन ने दुुकानदारों को आर्थिक संकट से जूझने पर मजबूर कर दिया है। सरकार से मांग है कि जरूरतमंद दुकानदारों की आर्थिक सहायता करे। कम से कम बिजली के बिल तो माफ ही होने चाहिए।
सुशील भराड़ा, प्रधान, इंसार बाजार, देवी मंदिर रोड।
किराया, लेबर, बिल तक नहीं भर पा रहे, हर दुकानदार परेशान : नारंग
शहर में बिल्कुल काम नहीं है। रात को 8 बजे के बाद दुकानदारी होती थी, लेकिन अब दुकानें बंद हो रही हैं। दिन में गर्मी के कारण ग्राहक नहीं आते। ऊपर से महंगाई ज्यादा हो रही है। खाने-पीने की चीजों के कच्चे मैटेरियल के रेट से ज्यादा हो गए। दुकानदारों का किराया, लेबर यहां तक का खर्चा उठाने में परेशानी आ रही है। ऐसे में दुकानदारों की हालात बेहद दयनीय हो चुकी है।
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कर्मचंद नारंग, प्रधान, मॉडल टाउन मार्केट, ढाबा एसोसिएशन।
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