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गांव कुराड़ स्थित एवीएस स्पीनिंग मिल अग्निकांड में में मारे गए श्रमिकों के शवों को उनके पैतृक

Sun, 27 Nov 2016 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
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गांव कुराड़ स्थित एवीएस स्पीनिंग मिल अग्निकांड में में मारे गए श्रमिकों के शवों को उनके पैतृक गांवों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की। मृतकों के शव उनके पैतृक गांव ले जाने के लिए रिश्तेदार पुलिस और डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाते रहे। निजी एंबुलेंस चालकों ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाया। किसी ने जरा सी दूरी के लिए दो हजार की मांग की तो किसी ने 1800 रुपये की। सरकारी एंबुलेंस के चालकों ने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि वह सिर्फ हरियाणा में ही जा सकते हैं। ऐसे में कई मृतक श्रमिकों के परिजनों को शवों का सनौली में अंतिम संस्कार करना पड़ा। दूसरी तरफ पुलिस सभी शवों को नि:शुल्क उनके पैतृक गांव भेजने का दावा कर रही है। कुछ श्रमिक प्रशासन की मंजूरी लेकर नि:शुल्क एंबुलेंस ले गए, जबकि कुछ रह गए। कुराड़ स्थित एवीएस स्पीनिंग मिल में शुक्रवार को आग की चपेट में आने से रामचंद्र, सोमबीर, अजित, राजवंती, अजीत, त्रिलोकी, विनोद, सन्नो और शबनम की मौत हो गई थी। इनके शवों का पोस्टमार्टम कराकर सनौली थाना पुलिस ने उनके परिजनों या रिश्तेदारों को सौंप दिया। प्रशासन ने सभी मृतकों के परिजनों को उनके हाल पर छोड़ दिया। अधिकतर मृतक बिहार या यूपी के रहने वाले थे। प्रशासन ने उनके शवों को उनके पैतृक गांवों तक पहुंचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की। डॉक्टरों ने भी नि:शुल्क में शव ले जाने की सुविधा से इनकार कर दिया। निजी एंबुलेंस चालक शवों को ले जाने के लिए अनापशनाप पैसे मांगने लगे। परिजनों की परेशानी उनकी जुबानी मृतका सन्नो के ममेरे भाई वसीम ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद वह शव को बड़ौत लेकर जाने चाहते हैं, लेकिन सरकारी एंबुलेंस चालक हरियाणा से बाहर नहीं जा रहे। निजी एंबुलेंस चालक दो हजार रुपये मांग कर रहे है। सन्नो की मां शबनम की भी मौत हो चुकी है। पिता का कोई अता-पता नहीं है। सन्नो का उसकी मां शबनम के अलावा कोई अपना सगा नहीं था। उनके पास एंबुलेंस चालकों को देने के लिए पैसे नहीं हैं। एक घंटे से प्रशासन से शव भेजने की गुहार लगा रहे है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सनौली में ही करना पड़ा अंतिम संस्कार मृतक रामचंद्र के रिश्तेदार भूपेंद्र ने बताया कि रामचंद्र मूल रूप से यूपी का रहने वाला था। आग की चपेट में आने से रामचंद्र की मौत हो गई। वह पोस्टमार्टम के बाद रामचंद्र के शव को यूपी लेकर जाना चाहते थे, लेकिन शवों को लेकर जाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। सभी एंबुलेंस चालक उनकी मजबूरियां का फायदा उठाकर दो या ढाई हजार रुपये की मांग कर रहे थे। इसलिए उन्होंने सनौली में ही रामचंद्र के शव का अंतिम संस्कार की सोची है। यह है मामला गांव कुराड़ के पास सनौली रोड स्थित एवीएस स्पीनिंग मिल में शुक्रवार को शाम चार बजे शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। गेट पर आग लगने से श्रमिक बाहर नहीं आ पाए। भयानक आग की चपेट में आने से आठ श्रमिक जिंदा जल गए, जबकि दो गंभीर रूप से झुलस गए थे। प्रशासन ने मिल की पीछे की दीवार को तोड़कर मृतकों और घायलों को बाहर निकाला था। सूचना पर प्रशासनिक अमला पहुंच गया था। दमकल विभाग की 25 गाड़ियों ने दस घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था। पुलिस ने फैक्ट्री के मालिक विजय व अजय कुमार निवासी गांधी मंडी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। सभी शवों का पोस्टमार्टम कराकर विसरा जांच के लिए मधुबन लैब में भेज दिया है। विसरा रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि श्रमिकों की मौत जलने से हुई है या दम घुटने से। डॉ. संजीव गुप्ता, सर्जन सिविल अस्पताल पानीपत नियमानुसार सरकारी एंबुलेंस प्रदेश के बाहर नहीं जा सकती, लेकिन अग्निकांड में मारे गए लोगों के परिजनों की मांग पर उपायुक्त की परमिशन से दूसरी एंबुलेंस भेजी गई। मेरे पास जो आश्रित आए थे, उनकी मदद की गई है। कुछ लोग पहले ही अपने स्तर पर एंबुलेंस का किराया पता करने चले गए होंगे। इसकी मुझे जानकारी नहीं है। डॉ. आलोक जैन, एमएस, सिविल अस्पताल पानीपत।
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