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रिफाइनरी के पास बना रहे थे नकली मोबिल ऑयल, कोलतार

Fri, 12 Aug 2016 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
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पानीपत - फोटो : पानीपत
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पानीपत। सीआईए वन ने पानीपत रिफाइनरी के नजदीक स्थित गांव रेरकलां के पास नकली मोबिल ऑयल और कोलतार बनाने वाली फैक्टरी का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने यहां से करीब 60 लाख रुपये कीमत का माल बरामद किया है। करीब दस घंटे तक चली कार्रवाई में मोबिल ऑयल के दो टैंकर, केमिकल के 25 ड्रम, 10 कट्टे चूने के और एक खाली टैंकर जब्त किया है। पुलिस ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सहयोग से सभी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। पुलिस का छापा पड़ते ही माफिया समेत करीब आधा दर्जन लोग भाग निकले। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीन चालकों समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में थाना मतलौडा पुलिस ने केस दर्ज किया गया है।
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सीआईए-वन प्रभारी इंस्पेक्टर अजय मोर ने बताया कि सीआईए-वन को शुक्रवार सुबह चार बजे सूचना मिली कि रेरकलां के पास नकली मोबिल ऑयल और कोलतार की फैक्टरी फ्रेंड्स केमिकल के नाम से चल रही है। उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस अधीक्षक राजेश दुग्गल को दी। अधिकारियों से अनुमति मिलने के बाद उन्होंने फैक्टरी पर छापा मारा। इस संबंध में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर रविंद्र को भी सूचना दे दी गई। पुलिस का छापा पड़ते ही फैक्टरी में काम करने वाले और अन्य लोग भाग निकले। पुलिस ने सात लोगों को मौके पर ही दबोच लिया। पुलिस ने फैक्टरी से मोबिल ऑयल से भरे दो टैंकर, एक खाली टैंकर, केमिकल के 25 ड्रम और दस कट्टे चूने के बरामद किए।

पुलिस ने हिरासत में लिए लोगों की पहचान मैनेजर शोहताब निवासी मुनक, विमल कुमार निवासी मुराना यूपी, पृथ्वी पाल निवासी गांव बेसाना यूपी, टैंकर चालक दलीप, धर्म काटा संचालक संदीप निवासी छपड़ा, अंबाला, तारा सिंह निवासी सिलवा नेपाल और ओमप्रकाश के रूप में की है। फैक्टरी मालिक सुभाष पंडित निवासी धर्मगढ़ (पानीपत) की बताई गई। बताया गया है कि तेल माफिया बिजेंद्र कादियान भी इस फैक्टरी में आता-जाता था। वह एक राजनैतिक दल से भी संबंध रखता है। पुलिस शनिवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश करेगी।
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एक टैंकर पर होती है एक लाख की बचत
पुलिस के अनुसार आरोपी फैक्टरी में मोबिल ऑयल और कोलतार तैयार करते थे। यहां से दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में सप्लाई कर देते थे। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि एक टैंकर मोबिल ऑयल बनाने में करीब 40 हजार रुपये खर्च आता था। सारे खर्च काटकर उन्हें एक टैंकर पर करीब एक लाख रुपये बच जाते थे।

दिल्ली के बड़े माफिया को करते थे सप्लाई
प्राथमिक जांच में सामने आया कि आरोपियों के दिल्ली और आसपास के बड़े-बड़े माफिया से संबंध है। वे मोबिल ऑयल और कोलतार उनको ही सप्लाई करते हैं।

ऐसे बनाते थे मोबिल ऑयल
फैक्टरी मैनेजर शोहताब ने पुलिस को बताया कि वे गाड़ियों और मोटरसाइकिलों से निकलने वाले खराब मोबिल ऑयल को खरीद लेते थे। वे फैक्टरी में इसका स्टोर करते थे। वे इसके एक ड्रम में एक पाउच मिला देते थे और रिफाइंड कर देते थे। इससे उसमें चिकनाहट बन जाती थी। इसके बाद इसे टैंकर में भरकर दिल्ली भेज दिया जाता था। दिल्ली के माफिया मोबिल ऑयल को पाउच में पैक कर मार्केट में सप्लाई कर देते थे।

ऐसे बनाते थे नकली कोलतार
मैनेजर के अनुसार कोलतार की सबसे उत्तम क्वालिटी 95 प्रतिशत रेशों वाला होता है। वे इसमें चूना मिला देते थे। इससे गुणवत्ता कम हो जाती थी, लेकिन वेट उतना ही बन जाता था। वे मिलावट करते समय हर पहलू का ध्यान रखते थे।

पहले भी हैं मुकदमे दर्ज
पुलिस के अनुसार फैक्टरी मालिक और पकड़े गए कई आरोपियों पर पहले भी यह धंधा करने के आरोप में कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने 2004 और 2010 में मतलौडा थाना में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस माफिया की पहले से ही तलाश में है। ये सब मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं।

सीआईए वन ने रेरकलां गांव में फ्रेंड्स केमिकल नाम से फैक्टरी पकड़ी है। इसमें नकली मोबिल ऑयल और कोलतार बनाया जाता था। प्राथमिक जांच में नकली तेल और कोलतार को दिल्ली सप्लाई करने की बात सामने आई है। पुलिस ने फैक्टरी मैनेजर समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। फैक्टरी मालिक और अन्य कई लोग पकड़ से बाहर हैं। पुलिस जल्द ही बाकी आरोपियों को भी काबू कर लेगी।
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अजय मोर, प्रभारी, सीआईए, पानीपत।
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