जिले समेत प्रदेश के कई गांवों और कॉलोनियों में शराब के ठेकों का लगातार विरोध हो रहा है। इन सबके बीच क्षेत्र के गांव रामनगर और जीतगढ़ की संयुक्त ग्राम पंचायत ने शराब बंदी लागू कर प्रदेश की अन्य पंचायतों के सामने नजीर पेश की है। गांव में शराब बंदी को एक माह हो चुका है। ग्रामीण शराब बंदी से खुश हैं। गांव में अवैध तरीके से शराब बेचने वालों ने अपना धंधा बदल लिया है। ये लोग अब सब्जी तक बेचने लगे हैं।
रामनगर और जीतगढ़ की पहली बार पंचायत बनी है। इससे पहले रामनगर, जीतगढ़ और गढ़ी सिकंदरपुर तीनों गांवों की एक पंचायत बनती थी। इस बार इन दो गांवों की अलग से पंचायत बनी है। इसकी पहली सरपंच महिला हैं। सरपंच मुकेश देवी ने बताया कि एक अप्रैल को गांव में शराब का ठेका खोला गया था। इस पर दोनों गांव की महिलाएं एकजुट हो गईं। उन्होंने सरपंच से मिलकर शराब ठेका बंद करवाने की मांग की। इसके बाद सभी महिलाओं ने ठेका बंद करा दिया।
अवैध शराब बेचने वालों ने ऐसे बंद किया धंधा
ग्राम पंचायत सरपंच और महिलाओं ने मिलकर फैसला लिया कि गांव में अवैध रूप से शराब बेचने वालों पर भी कार्रवाई की जाए। इसके बाद ग्राम पंचायत ने ऐसे लोगों पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाने की घोषणा कर दी। पंचायत की घोषणा के बाद गांव में माहौल बदल गया। गांव में एक माह के दौरान एक भी मामला शराब बेचने का नहीं आया। बताया जा रहा है कि दोनों गांवों के शराब बेचने वाले लोगों ने अपना धंधा बदल लिया है। वे अपनी आजीविका कमाने के लिए सब्जी की फेरी लगाते हैं या फिर मेहनत के दूसरे काम करने लगे हैं।
ग्रामीण रामेश्वर ने बताया कि गांव में शराब का चलन लगातार बढ़ता जा रहा था। इसके चलते गांव का माहौल लगातार बिगड़ रहा था। अब गांव में शराब बंद हो गई है। गांव में एक भी शराब का मुकदमा पिछले एक माह में दर्ज नहीं हो पाया है।
ग्रामीण राजेंद्र ने कहा कि शराब बंद होने से गांव में खुशहाली आई है। ग्राम पंचायत इसके लिए बधाई की पात्र है। अब गांव में शराबियों का जमघट या शराब दिखना तो दूर बाहर से भी कोई शराब पीकर नहीं आता दिखाई देता।
ग्रामीण पवन कुमार ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं और ग्राम पंचायत ने शराब बंदी के लिए बहुत संघर्ष किया। आज उनके संघर्ष का परिणाम गांव में दिखाई देता है। अब गांव में शराब की बिक्री नहीं होती। गांव का हर व्यक्ति इससे खुश है।
ग्रामीण रामभरोसे ने बताया कि गांव में शराब पूरी तरह से बंद हो गई है। यहीं साथ लगते दूसरे गांवों में भी बिकने वाली शराब को पकड़वाया गया है। अब गांव में तेजी के साथ बदलाव हो रहा है। लोग एक-दूसरे की इज्जत भी करने लगे हैं।
रामनगर और जीतगढ़ की संयुक्त रूप से पहली बार अलग पंचायत बनी है। ग्रामीणों ने मुझे सेवा का मौका दिया। गांव में शराब सबसे बड़ी समस्या थी। गांव में 10-10 रुपये में शराब बेची जाती थी। इससे अधिकतर ग्रामीण खासकर युवा भी बिगड़ रहे थे। महिलाओं ने एकजुटता दिखाई और वे मेरे साथ खड़ी र्हुइं। अब गांव में न शराब का ठेका खुल पाया है और न ही गांव में अवैध रूप से शराब बेची जा रही है। इन लोगों ने अब अपने परिवार का पेट पालने के लिए मेहनत करनी शुरू कर दी है। यह मेरे और ग्रामीणों के लिए बड़ी खुशी का विषय है।
मुकेश देवी, सरपंच, ग्राम पंचायत, रामनगर, जीतगढ़।