जिला सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने मेयर सुरेश वर्मा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही उन्हेें पुलिस जांच में शामिल होने के आदेश दिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई सात नवंबर को होगी। मेयर की गिरफ्तारी पर रोक लगने से पुलिस को तगड़ा झटका लगा है। मेयर अपने वकील या किसी अन्य व्यक्ति को साथ लेकर पुलिस जांच में शामिल हो सकते हैं।
इस मामले में मेयर ने खुद को बेकसूर बताया है। जिला सत्र न्यायाधीश एके सिंह पंवार की कोर्ट में वीरवार को मेयर सुरेश वर्मा की अग्रिम जमानत पर सुनवाई हुई। कोर्ट में बचाव पक्ष की तरफ से एडवोकेट रमेश गुप्ता, सरकार की तरफ से सरकारी वकील अशोक बागड़ी और सतपाल राणा की तरफ से एडवोकेट जयभगवान शर्मा ने अपनी-अपनी दलील पेश कीं।
कोर्ट ने तीनों वकीलों के पक्ष को करीब एक घंटे सुनकर मेयर सुरेश वर्मा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। साथ ही इस मामले को लेकर अगली तारीख सात नवंबर तय कर दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि मेयर सुरेश वर्मा को इससे पहले पुलिस जांच में शामिल होना होगा। कोर्ट का फैसला आते ही मेयर सुरेश वर्मा और उनके नजदीकियों का चेहरा खिल उठा।
बचाव पक्ष ने कहा, षड़यंत्र के तहत फंसाया
बचाव पक्ष के वकील एडवोकेट रमेश गुप्ता ने मेयर सुरेश वर्मा की अग्रिम जमानत और गिरफ्तारी पर रोक लगाने के मामले में कई दलील पेश की। एडवोकेट रमेश गुप्ता ने कोर्ट के सामने बताया कि मेयर सुरेश वर्मा को राजनीतिक षड़यंत्र के तहत फंसाया जा रहा है। कुछ लोग पहले भी ऐसा प्रयास कर चुके हैं।
उन्होंने इस मामले में पीड़ित सतपाल राणा के खिलाफ मेयर सुरेश वर्मा ने मानहानि, दीवानी और फौजदारी का केस दायर करने की दलील भी पेश की। यह केस 28 सितंबर को दायर किया गया है। इसमें सीनियर डिविजन और जेएमआईसी की कोर्ट में मामले चल रहे हैं। कोर्ट ने इन सबको देखते हुए मेयर की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
मेयर के पास तीन दिन का समय
मेयर सुरेश वर्मा की गिरफ्तारी पर सात नवंबर तक रोक लगाई है। कोर्ट इस मामले में सात नवंबर को फिर से सुनवाई करेगी। इसमें पुलिस को अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करनी होगी। ऐसे में मेयर सुरेश वर्मा के पास खुद को निर्दोष साबित करने के लिए तीन दिन का समय है। मेयर को इन तीन दिनों में पुलिस जांच में शामिल होना होगा।
सतपाल राणा के परिजन आज फूंकेंगे पुतला
पीड़ित सतपाल राणा के परिजन और उनके समर्थन में उतरी संस्थाओं के पदाधिकारी शुक्रवार को लघु सचिवालय के बाहर कांग्रेस समर्थित पार्षदों और कांग्रेसी नेता बुल्ले शाह का पुतला फूंकेंगे। परिजनों का आरोप है कि मेयर सुरेश वर्मा को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। जनता द्वारा चुने गए लोग जनता की बजाय एक आरोपी का साथ दे रहे हैं। इससे पीड़ित परिवार ही नहीं, जनता में भी रोष व्याप्त है।
यह है मामला
विदित है कि 16 अक्तूबर की रात डाबर कॉलोनी से वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रम से लौटते वक्त पानीपत ग्रामीण मोर्चा के प्रधान सतपाल राणा पर एक दर्जन अज्ञात लोगों ने जानलेवा हमला कर दिया था। उनको घायल अवस्था में सनौली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सतपाल राणा का आरोप था कि उसको गोली मारने की भी कोशिश की गई थी।
सतपाल राणा ने पुलिस में दी शिकायत में मेयर सुरेश वर्मा उसके पांच भाइयों के साथ ही सात-आठ अज्ञात लोगों पर जान से मारने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने सतपाल राणा के बयानों पर मेयर सुरेश वर्मा व उसके भाइयों दलबीर वर्मा, आजाद वर्मा, धनपत वर्मा, विक्रम वर्मा, विक्की व सात अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। पुलिस ने अब तक मामले में आजाद वर्मा, संजय वर्मा, विक्की, सुखविंद्र उर्फ सूखा, पिंटू को गिरफ्तार कर लिया है।
मेयर सुरेश वर्मा को कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। कोर्ट ने मेयर को सतपाल राणा पर जानलेवा हमला करने के मामले में जांच में शामिल होने के आदेश दिए हैं। पुलिस मेयर से पूछताछ कर मामले में आगामी कार्रवाई करेगी।
मनोज वर्मा, प्रभारी, सीआईए-टू, पानीपत।