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ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के बढ़े फर्जीवाड़े, पुलिस की साइबर सेल के सिग्नल वीक

Thu, 05 Jan 2017 11:47 PM IST
amar ujala beuro panipat
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x - फोटो : amar ujala
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पहले नोटबंदी और फिर कैशलेस ट्रांजेक्शन। लोगों ने अपना ट्रांजेक्शन का तरीका तो कुछ बदल लिया, लेकिन पुलिस का साइबर सेल कुछ भी नहीं बदला है। सुविधा व संसाधनों के चलते साइबर सेल का सर्वर आज भी डाउन चल रहा है। ऐसे में नोटबंदी के बाद ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के फर्जीवाड़े बढ़ने लगे हैं। ये लोग अकाउंड व खातों को हैक कर पासवर्ड पूछकर आसानी से लोगों के बैंक खातों को खाली कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद आधा दर्जन मामले पिछले 56 दिन में आ चुके हैं। पुलिस है कि अपनी कमी को छुपाते हुए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर फर्जीवाड़े के मामलों की शिकायत तक नहीं ले रही। ऐसे में लोग धोखाधड़ी के शिकार होने के बाद पुलिस व बैंक के बीच में उलझे हुए हैं।
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ये हैं पांच मामले,
किसी में कार्रवाई तो किसी में शिकायत तक नहीं ली
मामला-1
नोटबंदी के बाद जमा कराए थे 45 हजार, खाते से 50 हजार निकाले
थाना शहर के अंतर्गत रामकुमार निवासी रामनगर तहसील कैंप के बैंक खाते से करीब 50 हजार रुपये की ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर ली। रामकुमार ने बताया कि वह फेरी का काम करता है और उसने मेहनत कर पैसा जोड़ा था। उसने नोटबंदी के दौरान अपने खाते में 45 हजार रुपये जमा कराए थे। उसको इसी साल मकान बनाने के साथ अपनी बेटी की शादी भी करनी थी। गत दिनों उसके मोबाइल पर फोन आया और उक्त व्यक्ति ने एसबीआई की मुख्य शाखा का अधिकारी बताया और खाते से आधार कार्ड को जोड़ने के नाम पर उसका आधार कार्ड पूछा। उसने आधार कार्ड घर पर होने की बात बताई। उक्त व्यक्ति ने घर का नंबर देने की कही। उसने बैंक में जाकर आधार कार्ड जमा कराने की बात कही तो उसने बैंक में लंबी लाइन लगे होने के बारे में बताया। उसने उसकी बातों पर यकीन कर अपने घर का नंबर दे दिया। उक्त व्यक्ति ने उसके घर पर फोन किया और आधार कार्ड का नंबर ले लिया। इसके कुछ देर बाद उसके मोबाइल पर पांच मैसेज आए। वह काम के दौरान मैसेज को बारीकी से नहीं पढ़ सका। उसने शाम को घर जाकर मैसेज देखा तो वह मैसेज पढ़कर दंग रह गया। उसके खाते से अलग-अलग समय में 49,999 रुपये की ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की गई थी। उसने बैंक अधिकारियों व पुलिस को सूचित किया।  उक्त नंबर पर फोन किया तो उस व्यक्ति ने फोन पर बैंक व पुलिस अधिकारी से बात की। वह खुद को कभी लखनऊ से तो कभी पुलिस का बड़ा अधिकारी बताने लगा। थाना शहर पुलिस ने उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।


मामला-2
थाना चांदनी बाग के अंतर्गत रिसालू निवासी एक व्यक्ति के बैंक खाते से नोटबंदी के बाद छह दिन में करीब डेढ़ लाख रुपये की ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर लिया गया। सुनील कुमार निवासी रिसालू ने थाना चांदनी बाग पुलिस को शिकायत दी है। उसने बताया कि उसके पास किसी व्यक्ति का फोन आया और उससे बैंक व आधार कार्ड की डिटेल ले ली। उसके खाते से नौ से 14 दिसंबर तक 1,43,720 रुपये की ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर ली।
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मामला-3
गांव संजौली निवासी विनोद ने थाना बापौली पुलिस को शिकायत दी है। उसने बताया कि वह पानीपत पीवीआर में मेंनटेनेंस का काम करता है। उसका एसबीआई बापौली में खाता है। उसने 15 दिन पहले एटीएम इश्यू करवाया था। लेकिन वह चालू नहीं हुआ। जिसके बाद वह बैंक गया। जहां उसे एटीएम पर लिखे टोल फ्री नंबर पर कॉल करने की बात कही गई। अधिकारियों ने बताया कि वहां से आपको एक ओटीपी नंबर मिलेगा। जिसे एटीएम में डायल करने पर आपका एटीएम चालू हो जाएगा। विनोद का कहना है कि ऐसा करने के बाद भी एटीएम चालू नहीं हुआ। वह दो जनवरी को अपने घर पर ही था। उसके पास फोन आया। उक्त व्यक्ति ने कहा कि वह बैंक मैनेजर बोल रहा है। आपका एटीएम चालू हुआ। मैने एटीएम चालू न होने की बात कही। उसने कहा कि वह एक मैसेज कर रहा है। वह उस नंबर पर 16 डिजिट उसको बता दें। इसके कुछ देर बाद उसके खाते से पैसे कटने के चार मैसेज आए, लेकिन वह समझ नहीं पाया। 3 जनवरी को वह ड्यूटी पर था। उसी व्यक्ति का फिर फोन आया और उसने मोबाइल पर आए मैसेज के बारे में पूछा। इसके बाद फिर तीन बार पैसे निकाले जाने का मैसेज आया। जब साथी कर्मचारी को बताया तो उसने ठगी होने की बात कही। वह सीधे बैंक पहुंचा। उसने एटीएम बंद करवाया और पूछताछ की तो पता लगा कि उसके बैंक अकाउंट से 80 हजार रुपये निकाले जा चुके हैं।

मामला-4
काबड़ी रोड स्थित कालूपीर कॉलोनी निवासी दिनेश कुमार के बैंक खाते से दस हजार रुपये का फर्जीवाड़ा कर लिया गया। दिनेश कुमार धोखाधड़ी के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस व बैंक अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। उसने बताया कि उसका असंध रोड रामलाल चौक स्थित केनरा बैंक वह 24 दिसंबर को अपने घर पर था। उसके पास एक मोबाइल नंबर से सौ रुपये खाते से काटने का मैसेज आया। इससे अगली ही मिनट में 49सौ रुपये निकाल लिए गए। वह कुछ समझ पाता इसी समय उसके मोबाइल पर पांच रुपये और निकालने का मैसेज आया। उनके खाते से तीन बार में दस हजार रुपये पीओएस के माध्यम निकाल लिए गए। मैंने तुरंत कस्टमर केयर में फोन कर अपना एटीएम बंद करा दिया। वह बैंक प्रबंधक से अपनी शिकायत लेकर पहुंचा, लेकिन प्रबंधक ने उसकी शिकायत सुनने की बजाय उसको पुलिस में जाने की सलाह देने लग गया। वह पुलिस स्टेशन गया तो अधिकारियों ने उसकी शिकायत देखकर अपनी समस्याओं को गिनवाने लगे। अब तक न तो बैंक व न ही पुलिस द्वारा किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई।

मामला-5
सेक्टर-18 निवासी राजेश गोयल ने बताया कि उसकी रेलवे रोड पर आकाश इलेक्ट्रीकल के नाम से दुकान है। बुधवार को एक अंजान नंबर से फोन आया। खुद को बैंक का अधिकारी बताया और एटीएम व बैंक खाते से संबंधित डिटेल लेने लग गया। उसने उसका नाम पूछा तो उसने खुद को बैंक की चंडीगढ़ स्थित सर्कल कार्यालय का अधिकारी होना बताया। वह उसकी बातों को समझ गया और उसने को धमका दिया। इसके बाद व्यक्ति ने फोन काट दिया।

बैंक अधिकारी बोले फोन कॉल के बहकावे में न आएं
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य प्रबंधक सुरेंद्र पाठक ने बताया कि बैंक किसी भी प्रकार के डाक्यूमेंट को लेकर फोन के माध्यम से जानकारी नहीं लेता। बैंक इसको लेकर पत्राचार व्यवहार करता है। लोगों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए और लोगों को अपने बैंक खाते से संबंधित किसी तरह की जानकारी न दें। ऐसे किसी तरह के फोन आते हैं तो पुलिस में इसकी शिकायत दें। इस तरह के मोबाइल नंबर भी फ्रॉड होते हैं। ये लोग मुंबई मुख्यालय से होने की बात कहते हैं, जबकि मुख्यालय हर कार्य ब्रांच या जिला बैंक के माध्यम डाक्यूमेंट मांगता है।

पिछले साल एटीएम से फर्जीवाड़े के छह मामले दर्ज
लोगों का एटीएम बदलकर या पिन नंबर पूछकर धोखाधड़ी करने के पिछले छह मामलों से सीख लेनी चाहिए। इन मामलों में आज तक कुछ कार्रवाई हुई है तो वह है केवल मुकदमा दर्ज। इससे आगे न तो पुलिस पहुंच पाई है और न ही किसी तरह का आश्वासन मिल पाया है।
-29 फरवरी को नैन गांव निवासी जगदीश चंद्र ने थाना मतलौडा पुलिस में शिकायत देकर एटीएम बदलकर 72 हजार की धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए थे। यह मामला आज भी अनट्रेस चल रहा है।
-ईएसआई कॉलोनी निवासी वेद सिंह ने 13 मार्च को पुलिस को शिकायत दी थी। उसने लालबत्ती चौक स्थित एसबीआई के एटीएम से 1,99,268 रुपये की धोखाधड़ी करने की शिकयत थाना शहर पुलिस को दी थी।
-कुटानी रोड निवासी विशु फोगाट ने 14 मार्च को शिकायत देकर सनौली रोड एटीएम से 27 हजार रुपये धोखे से निकालने के आरोप लगाए थे।
-जाटल रोड निवासी अर्जुनराम ने थाना चांदनी बाग पुलिस को 14 मार्च को एटीएम बदलकर पैसों की धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए थे।
-शास्त्री कॉलोनी निवासी बलवान सिंह ने समालखा थाना में 22 मार्च को शिकायत देकर छह लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए थे।
-समालखा निवासी कल्चयाण ने चार अप्रैल को शिकायत देकर स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के एटीएम से 40 हजार रुपये का फर्जीवाड़ा करने के आरोप लगाए थे।

पुलिस साइबर सेल, वहीं ढाक के तीन पात
सरकार कैशलेस ट्रांजेक्शन अपनाने को लेकर लोगों को जागरूक कर रही है, लेकिन सरकारी विभाग खुद इसकी तैयारी में ढीले हैं। पुलिस की साइबर सेल के आज भी ढाक के तीन पात हैं। यहां पर किसी तरह के संसाधान या सुविधा नहीं बढ़ाई गई है। साइबर सेल के संसाधान भी अधिकतर समय पुलिस के दूसरे बड़े मामलों से संबंधित कार्रवाई में लगे रहते हैं। ऐसे में पुलिस अधिकारी भी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के फर्जीवाड़ों को ज्यादा महत्व नहीं दे रहे हैं।

पुलिस किसी तरह की शिकायत लेकर तुरंत कार्रवाई करती है। सभी चौकी व थाना प्रभारियों को पहले दिन ही आदेश कर दिए गए थे। पुलिस की साइबर सेल के संसाधनों के बारे में कुछ भी नहीं बताया जा सकता। पुलिस ऑनलाइन ठगी के मामलों को लेकर गंभीर है और सब मामलों की कार्रवाई रिपोर्ट मीटिंग में ली जाती है।
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राहुल शर्मा, एसपी, पानीपत। 
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