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रिश्वत की रकम के साथ ईएसआई दबोचा, तीन घंटे बाद हेडकांस्टेबल को बना दिया मुख्य आरोपी

Wed, 23 Nov 2016 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ पानीपत
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पानीपत - फोटो : bureau
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विजिलेंस पानीपत ब्यूरो ने 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पुलिस की क्राइम ब्रांच सीआईए-टू में एक थानेदार को रंगे हाथों दबोचा लिया इस दौरान अतिरिक्त प्रभारी भाग निकला। मामले में सीआईए-टू के अतिरिक्त प्रभारी पर भी आरोप है। विजिलेंस और जिला
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पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने विजिलेंस ब्यूरो में बंद कमरे में करीब तीन घंटे की जांच के बाद दोनों थानेदारों को क्लीन चिट दे दी और हवलदार को मुख्य आरोपी बना दिया। शिकायतकर्ता अतिरिक्त प्रभारी और दूसरे थानेदार को आरोपी बताता रहे हैं।

लेकिल, पुलिस अधिकारियों ने उसकी कोई सुनवाई नहीं की। आरोप है कि अतिरिक्त प्रभारी ने मोबाइल के एक मामले में फंसे युवक से एक लाख रुपये की मांग की थी। बाद में 25 हजार में सौदा तय हुआ था। पीड़ित 15 हजार रुपये लेकर सीआईए-टू में पहुंचा था।
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विजिलेंस के जिला ब्यूरो की टीम ने मंगलवार को सीआईए-टू पानीपत के अनाज मंडी स्थित कार्यालय में रिश्वत मांगने की शिकायत पर छापा मारा। पुलिस ने सीआईए-टू में तैनात ईएसआई इंद्र कुमार को गांव नारायणा निवासी रमेशचंद्र से 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया।

रमेश चंद्र का आरोप है कि एसआई बिजेंद्र त्यागी, ईएसआई इंद्र सिंह और हेड कांस्टेबल डिम्मी ने उसके दामाद प्रदीप निवासी गांव सुताना को चोरी के झूठे मामले में फंसाने का डर दिखाकर 15 हजार रुपये की रिश्वत ली है। विजिलेंस के छापे के दौरान एसआई बिजेंद्र त्यागी भाग गए,

जबकि तीसरा आरोपी हवलदार डिंपी मौके पर नहीं था। रमेश चंद्र निवासी गांव नारायणा ने बताया कि वह पेशे से किसान है। उसकी बेटी सुमन की शादी चार साल पहले गांव सुताना निवासी प्रदीप के साथ हुई थी। प्रदीप करनाल के निजी अस्पताल में एक्स-रे विभाग में कार्यरत है।

चार दिन पहले उसकी बेटी सुमन ने उसको फोन कर बताया कि घर पर सीआईए-टू की टीम आई थी। टीम में एसआई बिजेंद्र त्यागी और हेडकांस्टेबल डिंपी आदि थे। उन्होंने उससे प्रदीप के बारे में पूछा और कहा कि प्रदीप ने मोबाइल चोरी किया है। वह उसे पकड़ने आए हैं।

यह कहकर सीआईए-टू की टीम चली गई। उसने तुरंत प्रदीप को फोन कर मोबाइल फोन के बारे में पूछा। प्रदीप ने बताया कि उसने तो मोबाइल गांव के ही मोनू से 5500 रुपये में खरीदा है। रमेश ने बताया कि उसने प्रदीप को शनिवार को सीआईए-टू कार्यालय में आने के लिए कहा।

शनिवार को वह प्रदीप और गांव के कई लोग सीआईए-टू कार्यालय पहुंचे। उस वक्त वहां अतिरिक्त प्रभारी एसआई बिजेंद्र त्यागी, ईएसआई इंद्र सिंह और हेडकांस्टेबल डिंपी थे। उन्होंने कहा कि प्रदीप ने मोबाइल फोन चोरी किया। कुछ देर बात करने के बाद बिजेंद्र त्यागी ने प्रदीप और अन्य लोगों को कमरे से बाहर कर दिया

उससे अकेले में बात की। रमेश का आरोप है कि बिजेंद्र त्यागी और हेडकांस्टेबल डिंपी ने कहा कि यदि प्रदीप को बचाना है तो एक लाख रुपये का इंतजाम कर लो, नहीं तो मुकदमे में फंसा देंगे। उसने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो थानेदार ने कहा कि वह बेशक पुराने नोट दे दें।

वह खुद इन नोटों को बदलवा लेगा। रमेश के अनुसार, उसने 25 हजार रुपये तक देने के लिए पुलिस को मना लिया। पुलिस कर्मचारियों ने पैसों का इंतजाम करने के लिए दो दिन का समय दिया। वह तीन बजे सीआईए-टू कार्यालय से निकल आए। रमेश ने बताया कि उसने सोमवार को विजिलेंस इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार को फोन किया।

उस वक्त नरेंद्र कुमार बाहर थे। उन्होंने मंगलवार को विजिलेंस ब्यूरो कार्यालय में मिलने के लिए कहा। वह मंगलवार सुबह नौ बजे विजिलेंस कार्यालय में इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार से मिले और पूरा मामला बताया। इस दौरान 11:30  बजे हेडकांस्टेबल डिंपी का उसके पास फोन आया और पैसों के इंतजाम के बारे में पूछा।

उसने डिंपी से कहा कि उसके पास 15 हजार रुपये हैं। इनमें काम चला लो। वह 10 हजार बाद में दे देगा।  रमेश के अनुसार डिंपी ने कहा कि वह सीआईए-टू कार्यालय में आकर पैसे दे दे। विजिलेंस इंस्पेक्टर ने पूरे मामले के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया।

उच्च अधिकारियों ने जीवेंद्र मलिक तहसीलदार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट और कानूनगो कृष्ण को छाया गवाह नियुक्त किया। विजिलेंस ने जीवेंद्र मलिक को दो-दो हजार के सात और 100 रुपये के दस नोट पाउडर लगाकर दिए। रमेश चंद्र के अनुसार, वह मंगलवार तीन बजे सीआईए-टू कार्यालय में पैसे लेकर पहुंचे।

उस वक्त कार्यालय में एसआई बिजेंद्र त्यागी और इंद्र सिंह थे। एसआई बिजेंद्र त्यागी ने कहा कि वह पैसे इंद्र सिंह को दे दें। उसने पैसे इंद्र सिंह को दे दिए और वह कार्यालय से बाहर निकल गया। इसके तुरंत बाद विजिलेंस ने छापा मार दिया। विजिलेंस को देखकर एसआई बिजेंद्र त्यागी भाग गया।

विजिलेंस ने इंद्र सिंह की तलाशी ली, लेकिन उसके पास पैसे नहीं मिले। पैसे पास ही बैंच पर रखे मिले। उन्होंने इंद्र सिंह के हाथ धुलवाए तो उसके हाथ लाल हो गए। इंद्र सिंह ने विजिलेंस की टीम को बताया कि उस वक्त उसको पैसे दिए थे। कहा था कि पैसे डिंपी को दे देना।

ये पैसे डिंपी के हैं। उसको पैसों के बारे में कुछ पता नहीं है। विजिलेंस ने इसके बाद ईएसआई इंद्र सिंह को हिरासत में ले लिया।

दो डीएसपी और दो इंस्पेक्टर ने की तीन घंटे जांच
मामले की सूचना पर विजिलेंस डीएसपी सुशील कुमार, डीएसपी सिटी देशराज सिंह और सीआईए-टू प्रभारी मनोज वर्मा मौके पर पहुंचे। विजिलेंस कार्यालय में तीन घंटे बंद कमरे में इन अधिकारियों ने मीटिंग की। अतिरिक्त प्रभारी बिजेंद्र त्यागी का शिकायत में कहीं पर भी नाम है।

मीटिंग के बाद ईएसआई इंद्र कुमार को मामले में सरकारी गवाह बना लिया गया। कहा गया कि ईएसआई का नाम शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में नहीं दिया है। इसलिए उन्हें सरकारी गवाह बनाया गया है। मामले का मुख्य आरोपी डिंपी हेडकांस्टेबल है। वह फिलहाल फरार है। विजिलेंस की तीन टीमें आरोपी को पकड़ने में लग गई हैं।

थानेदार बोले, प्रभारी को देने है पैसे
रमेश चंद्र ने बताया कि शनिवार को एसआई बिजेंद्र त्यागी और हेडकांस्टेबल डिंपी ने उससे कहा कि वह एक लाख रुपये लेंगे। उसने 25 हजार रुपये देने की बात कही तो थानेदार त्यागी ने कहा कि उन्हें पैसे इंस्पेक्टर को देने पड़ते हैं।

ठगा सा महसूस कर रहा शिकायतकर्ता
तीन घंटे बंद कमरे मेें मीटिंग के बाद ईएसआई इंद्र सिंह को मामले से लगभग निकाल दिया गया है। ईएसआई इंद्र सिंह को सरकारी गवाह बनाकर पेश किया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस और विजिलेंस पर आरोपियों को मामले से जान बुझकर निकालने का आरोप लगाया।

दोनों विभागों की कार्रवाई के बाद रमेश चंद्र खुद को ठगा सा महसूस कर रहे है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस मामले में अतिरिक्त प्रभारी बिजेंद्र त्यागी का पूरा रोल है।

उसके पास पैस मांगने की रिकार्डिंग है
रमेश चंद्र ने बताया कि डिंपी ने मंगलवार को तीन बार उसको फोन कर पैसे मांगे। उसके पास मोबाइल फोन पर आरोपी डिंपी की रिकॉर्डिंग है। उन्होंने आरोपी की रिकार्डिंग पुलिस और विजिलेंस अधिकारियों को भी सुनाई है। उसकी सीडी भी बनवाई है। यह सीडी वह कोर्ट में पेश करेंगे।

विजिलेंस पहले भी सहयोगियों को कर चुकी है काबू
विजिलेंस ने रिश्वत मांगने वाले आरोपी के न मिलने पर उसके किसी जानकार या नजदीकी के पास रिश्वत के पैसे मिलने पर पहले भी कई गिरफ्तारी कर चुकी है। विजिलेंस ने समालखा निवासी एक कर्मचारी को उसके भाई के साथ रिश्वत के आरोप में पकड़ा था।

कर्मी ने किसी से रिश्वत मांगी थी, जबकि उसके भाई ने वह पैसे पकड़े थे। विजिलेंस ने दोनों को आरोपी बनाया था। गत दिनों तहसील में तीन कर्मचारियों को रिश्वत के आरोप में पकड़ा था। उनका भी इसी तरह का मामला था।

गांव नरायणा निवासी रमेश चंद्र ने शिकायत की थी कि सीआईए-टू में तैनात हेडकांस्टेबल डिंपी उनके दामाद को झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर 25 हजार रुपये मांग रहा है। उन्होंने उनकी शिकायत पर एक टीम गठित की। टीम ने रमेशचंद्र को 15 हजार रुपये देकर सीआईए-टू में भेजा।

रमेश चंद्र सीआईए-टू में पैसे देकर बाहर आ गए तो उन्होंने सीआईए-टू में छापा मार दिया। टीम ने इंद्र सिंह से पैसों के बारे में पूछा तो इंद्र सिंह ने बताया कि एक व्यक्ति डिंपी हेडकांस्टेबल के नाम के पैसे देकर गया है। उन्हें पैसों के बारे में जानकारी नहीं है। पैसे एक बैंच पर रखे मिले हैं। पुलिस ने इंद्र सिंह को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है। मुख्य आरोपी डिंपी है। उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है।
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नरेंद्र कुमार, प्रभारी विजिलेंस ब्यरो पानीपत
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