स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल आने की दौड़ में कूदा पानीपत नगर निगम ओडीएफ में पिछड़ रहा है। हालांकि, निगम अधिकारी ओडीएफ को सफल होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हकीकत बेहद बदसूरत है। शहर में ओडीएफ पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी लोग खुले में शौच जा रहे हैं। बाहरी कॉलोनियों में हालात और भी चिंताजनक हैं। यह सब तब है, जबकि नगर निगम के अधिकारी सुबह और शाम खुले में शौच करने वालों को जागरूक करने का दावा कर रहे हैं।
नगर निगम में नवंबर 2016 में ओडीएफ अभियान शुरू किया था। उसी समय से निगम की पूरी टीम खुले में शौच से मुक्त पानीपत बनाने में जुट गई थी। निगम ने पिछले माह करीब 80 प्रतिशत सफलता पाने का दावा किया था। लेकिन, लोगों की आदत और निगम के लंबे चले अभियान में अधिकारियों, कर्मचारियों का घटता रुझान अभियान को झटका दे रहे हैं।
शहर में 30 स्थायी और करीब 12 मोबाइल टॉयलेट
नगर निगम ने ओडीएफ को लागू करने में सबसे बड़ी दिक्कत सार्वजनिक शौचालयों की है। निगम अधिकारियों ने 30 स्थायी और 12 मोबाइल टॉयलेट स्थापित करने का फैसला लिया था। इनमें से 26 टॉयलेट बन चुके हैं। इनमें से आधे ही प्रयोग करने की स्थिति में हैं। चार टॉयलेटों का काम चल रहा है। एक टॉयलेट पर करीब 12 लाख रुपये की लागत आई है। इसकी ठेकेदार को एक साल तक मरम्मत भी करनी होगी। इसके अलावा 12 मोबाइल टॉयलेट बनाए हैं। इनमें चार से छह और आठ से दस सीटर टायलेट बनाए हैं।
करीब पांच हजार घरों में आज भी टॉयलेट नहीं
नगर निगम के 2011 के सर्वे के अनुसार करीब 11 हजार मकानों में टॉयलेट नहीं है। निगम ने इन में से करीब 50 प्रतिशत मकानों में टॉयलेट स्थापित करवा दिए हैं। करीब पांच हजार मकानों में आज भी टॉयलेट नहीं हैं। निगम का दावा है कि ये लोग सार्वजनिक शौचालयों को आसानी के साथ प्रयोग कर सकते हैं।
खाली प्लॉट, अन्य जगह खेत बने केंद्र
शहर में ओडीएफ को लेकर लोग भी जागरूक नहीं हैं। शहर के बीचोंबीच खाली पड़े प्लाट खुले में शौच करने वालों का केंद्र बने हुए हैं। बाहरी कॉलोनियों में साथ लगते खेत, नाले और नहर पर लोग खुले में शौच कर रहे हैं। कुछ लोग खुले में शौच करने की आदत से परेशान हैं। वे घर में टॉयलेट होने के बाद भी इसका प्रयोग नहीं कर रहे।
नगर निगम अधिकारी ओडीएफ को लेकर खानापूर्ति कर रहे हैं। मोबाइल टॉयलेट और स्थायी टॉयलेट मांग अनुसार नहीं रखे गए हैं। स्वच्छता अभियान से पहले बाहरी कॉलोनियों की गली और सड़कों को पक्का करना, पानी निकासी के पुख्ता प्रबंध करना जरूरी है। इसके बिना स्वच्छता संभव नहीं हो सकेगी।
संजीव दहिया, पार्षद, वार्ड-18
नगर निगम में ओडीएफ पूरी तरह से सफल रहा है और निगम की टीम अब भी बाहरी कॉलोनियों में काम कर रही हैं। शहर को साफ सुथरा बनाने की दिशा में भी लगातार काम किया जा रहा है।
वीना हुड्डा, आयुक्त नगर निगम पानीपत।
दोनों कोट्स लोगों के नीचे लगेंगे
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शहर को पॉलिथीन मुक्त बनाने को लेकर नगर निगम को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। नगर निगम ऐसी फैक्ट्री और दुकानों को सील कर पॉलिथीन को बंद कर सकता है। इसके अलावा बाजार में भी लगातार अभियान चलाए जा सकते हैं। इसको लेकर प्रशासन व नगर निगम दोनों को अपनी जिम्मेदारी को निभाना होगा।
नेमचंद जैन, संयोजक, समान नागरिक संहिता अभियान, पानीपत।
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निगम के सब दावे शहर में हवा हो रहे हैं। अधिकारियों के दावे बड़े हैं, लेकिन धरातल पर काम नहीं है। हुडा सेक्टर में सड़क तक नहीं बनाई जाती। अधिकारियों के पास संसाधन हैं। उनको इसका सदुपयोग करना चाहिए। अधिकारी स्वच्छता की दिशा में काम करते तो पानीपत का नंबर 335वां नहीं आता। निगम की मीट की दुकान बंद करना और झुग्गी झोपड़ियों को तोड़ना कमजोरी को छुपाने वाला है। आवारा पशु शहर में घुम रहे हैं, लेकिन अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है।
भूपेंद्र सिंह, पूर्व मेयर एवं वार्ड-11 पार्षद, पानीपत।