सरपंच घर पर कर रही चूल्हा चौका, पति कर रहे चौधर
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इसराना। महिला सशक्तिकरण के दावे चाहे लाख किए जा रहे हों, लेकिन आज भी कई स्थानों पर महिलाओं को मिले पद के नाम पर उनके पति ही चौधर करते नजर आ रहे हैं।
आलम यह है कि गांव में महिला सरपंच होने पर भी महिला घर की चार-दीवारी तक ही सीमित देखी जा रही है। महिला को बहुत कम लोग सरपंच मानते हैं ज्यादातर उसके पति को ही सरपंच साहब कह कर पुकारते है। अमर उजाला ने ग्राम सभाओं की बैठक के माध्यम से महिलाओं के अधिकारों व महिला सशक्तिकरण के दावों का रियल्टी चेक किया तो नजारा कुछ यहीं मिला। महिलाओं को आगे न कर उनके नाम पर चौधराहट के इस खेल से महिला सशक्तिकरण के दावे कोसों दूर नजर आ रहे है। जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी भी ग्राम सभाओं के आयोजन को लेकर गंभीर नजर नही आए। इसराना खंड़ के दस गांवों में सोमवार को ग्रामसभाओं का आयोजन चला जिनमें से छह गांवों में महिला सरपंच है।
वाक्या नंबर वन
इसराना के नजदीकी गांव में ग्राम सभा के लिए सुबह दस बजे तय किया गया है। सवा दस बजे रियल्टी चेक की गई तो मौके पर ग्राम सचिव ग्राम सभा की कार्रवाई दर्ज कर रही थी, कुछ लोगों जिनमें कुछ महिलाएं भी शामिल है, अपनी बात दर्ज करा रही थी। इस पूरी कार्रवाई के दौरान गांव की महिला सरपंच नदारद थी। जैसे ही पूछा गया कि सरपंच कहां है कुछ का जवाब था कि वो अभी कही गया है बताने वालों का तात्पर्य महिला सरपंच के पति से था। इसी दौरान ग्राम सचिव ने तुरंत कही फोन मिलाया व कहा कि मूर्ति देवी को भेज दो।
वाक्या नंबर दो : इसराना के नजदीकी एक दूसरे गांव में भी ग्राम सभा के लिए दस बजे का ही समय तय था व गांव की सरपंच भी महिला ही थी। रियल्टी चेक करने के लिए जब वहां साढ़े दस बजे पहुंचे तो गांव की चौपाल में ग्राम सभा का आयोजन चल रहा था। ग्राम सचिव लोगों से चर्चा कर कार्रवाई दर्ज कर रहा था, लेकिन यहां भी महिला सरपंच मौजूद नही मिली। महिला सरपंच के स्थान पर उसका पति ग्राम सचिव को निर्देश देते हुए ग्राम सभा का संचालन कर रहा था।