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4 करोड़ कीमत की 722 ग्राम हेरोइन के साथ पंजाब का तस्कर पानीपत में काबू

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पानीपत। श्रीनगर से पंजाब व पंजाब से दिल्ली के लिए हेरोइन ले जा रहे पंजाब लुधियाना निवासी हेरोइन तस्कर को पानीपत सीआइए-थ्री ने नाकेबंदी कर सेक्टर 25 मोड़ स्थित मलिक पेट्रोल पंप के बाहर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के कब्जे से एक इंडिका कार व पॉलिथीन से हेरोइन बरामद की गई। हेराइन का वजन 722 ग्राम मिला। जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत चार करोड़ रुपये है। पूछताछ में आरोपी ने अपनी पहचान वरुण भोगन निवासी लुधियाना पंजाब के रूप में बताई। आरोपी को रविवार को कोर्ट मेें पेश कर 9 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। पुलिस का दावा है कि रिमांड के दौरान इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा।
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पुलिस को देख गाड़ी छोड़ हेरोइन उठा भागा था आरोपी
रविवार को सीआईए-थ्री थाने में आयोजित प्रेस वार्ता में उप पुलिस अधीक्षक मुख्यालय सतीश वत्स ने बताया कि पानीपत पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ सशक्त अभियान चला रखा है। वहीं शनिवार की शाम को सीआईए-थ्री प्रभारी एसआई छबील सिंह को सूचना मिली थी कि एक संदिग्ध किस्म का व्यक्ति इंडिका कार संख्या पीबी-10-एफई-3626 में सवार हो पंजाब से दिल्ली की तरफ जा रहा है। जिसके पास नशीला पदार्थ होने की संभावना है। टीम ने तुरंत जीटी रोड सेक्टर 25 मोड़ मलिक पेट्रोल पंप के पास वाहनों की गहनता से जांच आरंभ कर दी। कुछ समय पश्चात उक्त नंबर की इंडिका कार जीटी रोड करनाल की तरफ से आती हुई दिखाई दी। पास आने पर पुलिस टीम ने कार चालक को नाके पर रोकने का इशारा किया, तो चालक ने कार को नाके पर न रोककर थोड़ा आगे रोका व कार चालक एकदम से हाथ में हेरोइन से थैली ले भागने की कोशिश करने लगा। पुलिस टीम ने कार चालक करीब 10 कदम की दूरी पर ही काबू कर लिया।
एक करोड़ की खरीदी थी, बेचने पर मिलते चार करोड़
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में हेरोइन तस्कर वरुण ने बताया कि हेरोइन की डिमांड ज्यादातर पंजाब के अधिकांश क्षेत्रों सहित दिल्ली के कई इलाकों के लोग करते हैैं। ये लोग उन तक हेरोइन पहुंचाने की मुंह मांगी कीमत देते हैं। गिरोह में काम करने वाले अधिकतर लोग शुरुआती दौर में काफी गरीब थे, जो सिर्फ इसी की कमाई से अमीर बनें हैं। उसने बताया कि उसने यह हेरोइन श्रीनगर के एक तस्कर ने एक करोड़ रुपये में खरीदकर दी थी। जिसको दिल्ली के कमला नगर के तस्करों तक पहुंचाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की कीमत के हिसाब से चार करोड़ रुपये मिलने थे। जिसके बाद एक करोड़ रुपये का भुगतान श्रीनगर में तस्कर को किया जाता।
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