पानीपत। कोयला से उद्योगों का संचालन कर लाखों लोगों को रोजगार देने वाले उद्यमियों के पास महज चार दिन का वक्त है। चार दिन बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड संयुक्त रूप से कार्रवाई के लिए उद्योगों का निरीक्षण करेंगे। उद्यमियों को नोटिस जारी करेंगे और इसके बाद उद्योगों पर ताला लगाया जाएगा। एक अक्तूबर से एनसीआर में ग्रैप भी लागू हो रहा है। ग्रैप के तहत भी कोयला आधारित उद्योग नहीं चल पाएंगे। ऐसे में ग्रैप के तहत सिर्फ पीएनजी संचालित उद्योग ही चलेंगे। कोयला संचालित लगभग पांच सौ उद्योग बंद हो जाएंगे। अक्तूबर उद्यमियों के लिए कई बड़ी चुनौतियां लेकर आएगा। वहीं दूसरी ओर उद्यमी 30 सितंबर के अल्टीमेटम से निपटने के लिए लगातार मीटिंग कर रहे हैं। औद्योगिक संगठन उद्यमियों से प्रदूषण को नियंत्रित करने की अपील भी कर रहे हैं। उद्यमी सांसद संजय भाटिया के माध्यम से सीएम मनोहर लाल से मिलने का भी प्रयास कर रहे हैं, ताकि उद्योगों को बचाया जा सके। जहां पीएनजी की पाइपलाइन नहीं बिछी है वहां उद्योगों को पीएनजी की सप्लाई लेने के लिए एक दिसंबर तक का वक्त मिला है।
फिलहाल शहर में सेक्टर 25 और सेक्टर 29 में पीएनजी पाइपलाइन का काम पूरा हो चुका है। यहां पीएनजी की सप्लाई दी जा रही है। शहर में 48 उद्योग पीएनजी पर हैं। 40 उद्यमियों ने पीएनजी के लिए आवेदन किया है। इन उद्योगों में पीएनजी सप्लाई दी जा रही है। सेक्टर 29 और 25 में पीएनजी सप्लाई का काम पूरा होने के बाद ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में उद्योगों में कनेक्शन दिए जाएंगे।
फिलहाल उद्यमियों को 14 रुपये के हिसाब से कोयला मिल रहा है। पीएनजी का रेट 48.50 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर है। पीएनजी का कनेक्शन लेने पर उत्पादन तीन गुना तक महंगा होगा। उद्यमियों को अपने उत्पाद महंगे करने पड़ेंगे। ऐसे में पानीपत के उद्यमी लुधियाना व गुजरात के उद्यमियों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।
ग्रैप के तहत सिर्फ पीएनजी संचालित उद्योग ही चलेंगे। पानीपत में लगभग 400 डाइंग यूनिट हैं। 100 यूनिट पोलर, थ्री डी व मिंक यूनिट हैं। अगर एक उद्योग बंद होता है तो सभी उद्योग बुरी तरह प्रभावित होंगे। सभी उद्योग एक दूसरे से जुड़े हैं।
अब एक अक्तूबर से ग्रैप लागू हो रहा है। 30 सितंबर के बाद अगर उद्योग बंद किए गए तो वो पलायन को मजबूर हो जाएंगे। पीएनजी की सप्लाई लेने के बाद वो दूसरे उद्यमियों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे। तीन गुना महंगा उत्पादन हो जाएगा।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन