गांव सिवाह के 60 और जाटल के 40 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में दूषित पानी को ट्रीट कर परीक्षण किया जाएगा। इसमें सीवर से आने वाले पानी और एसटीपी से ट्रीट किए गए पानी की जांच की जाएगी। नगर निगम दोनों जगह लेबोरेट्री बनाएगा। इसको लेकर 11.60 लाख रुपये से केमिकल भेजने का काम करेगा। ताकि गंदे पानी में की ये परख हो सके कि इसे किस प्रकार से ट्रीट कर प्रयोग लायक बनाया जा सकता है। नगर निगम ने इसका टेंडर लगा दिया है।
जन स्वास्थ्य विभाग का सिवाह व जाटल रोड पर क्रमश: 60 और 40 एमएलडी के दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांंट हैं। अब यहां पानी को ट्रीट कर ड्रेनों में छोड़ दिया जाता है। यह पानी आगे जाकर किसी काम में प्रयोग नहीं किया जाता है। सिवाह एसटीपी से पानी यमुना और जाटल रोड एसटीपी का पानी डाहर गांव से होते हुए आगे जाता है। ऐसे में पानी प्रयोग में नहीं लाया जा पा रहा।
डाई हाउस संचालक मांग रहे पानी
शहर में डाई हाउस के लिए अलग से सेक्टर दिया गया है। डायर्स के सामने पानी की बड़ी किल्लत है। इनको नहर से भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। वे अपने ट्यूबवेल से भी पर्याप्त पानी नहीं ले पाते हैं। डायर्स लंबे समय से सरकार से एसटीपी का ट्रीट पानी डाई हाउस में प्रयोग के लिए मांग रहे हैं। इसको लेकर एक प्रपोजल भी बना है, लेकिन इसकी फाइल निदेशालय में अटकी हुई है। अब नगर निगम सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पर पानी की जांच करने के लिए लेबोरेट्री लगाएगी। यहां पानी की गुणवत्ता का पता लगाया चल पाएगा। इसके बाद खेती और इंडस्ट्री में इसके प्रयोग का फैसला लिया जाएगा। यह एक तरह से नशा शोध होगा। यह सिरे चढ़ता है तो पानीपत के उद्योग और खेतों की मांग को काफी हद तक पूरा किया जा सकेगा।
वर्जन :
दोनों जगह ट्रीट किए पानी को दोबारा उपयोग में लाने के लिए ये प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस पानी को फायर ब्रिगेड, व्यापारियों और खेती बाड़ी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
अर्पित बुधवार, एमई, नगर निगम पानीपत।