पानीपत। लोकसभा चुनाव में अधिकारियों की व्यस्तता और प्रदेश भर में लगी आचार संहिता को लेकर नगर निगम अब तक प्री मानसून की तैयारी में फेल साबित होता नजर आ रहा है। मई माह तकरीबन पूरा निकल चुका है लेकिन अब तक निगम ने शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली ड्रेन नंबर एक की सफाई तक शुरू नहीं कराई है। ऐसे में मानसून आने पर शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा जाने की आशंका है।
उल्लेखनीय है कि अधिकारी आचार संहिता की समाप्त होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं और नए टेंडर होने की बाट जोह रहे हैं। अब तक ड्रेन नंबर एक की सफाई सिंचाई विभाग करवाता आ रहा था। जिस पर सिंचाई विभाग महज 10 से 11 लाख रुपये खर्च किया करता था। केवल पिछले साल से सिंचाई विभाग ने ड्रेन को नगर निगम के हैंडओवर किया है। पिछले साल ही निगम ने इसकी सफाई तो कराई लेकिन सिंचाई विभाग के बजट से पांच गुणा ज्यादा में कराई। निगम ने ड्रेन की सफाई इंजीनियरिंग ब्रांच से करीब 58 लाख रुपये में कराई थी। अब फिर से ड्रेन की सफाई का काम निगम के जिम्मे रहेगा।
अधिकारियों का कहना है कि ड्रेन की सफाई के लिए अलग से टेंडर लगाना होगा, जो आचार संहिता के चलते लग नहीं सकता। शहर की दो जोन में सफाई कराने का ठेका अब 30 जून तक बढ़ाया गया है। इस ठेके में ड्रेन की सफाई का काम शामिल नहीं है। इसलिए अब निगम को अलग से मशीनरी और मैनपावर लगाकर ड्रेन की सफाई करानी पड़ेगी। जिसके बाद जब सफाई का नया टेंडर बनेगा तो इसमें ही ड्रेन की सफाई के काम को भी शामिल किया जाएगा। गौरतलब है कि ड्रेन नंबर एक से सात वार्डों की 35 से ज्यादा कॉलोनियां सटी हैं। जबकि इस पर आधे से ज्यादा शहर की निकासी निर्भर करती है। फिलहाल ड्रेन में इतना कचरा भरा हुआ है कि इसमें गंदे पानी की जगह कचरा ही नजर आता है। अगर ड्रेन की सफाई नहीं कराई गई तो ड्रेन ओवरफ्लो हो जाएगी और गंदा पानी शहर की सड़कों पर होगा। इस विषय को लेकर निगम आयुक्त ने अधिकारियों को भी निर्देश जारी किए हैं कि वे अपनी मशीनरी और मैनपावर से ड्रेन की सफाई कराएं।
इस बारे में निगम के मुख्य सफाई निरीक्षक जितेंद्र नरवाल का कहना है कि ड्रेन की सफाई का प्लान तैयार किया जा रहा है। निगम आयुक्त के निर्देशानुसार इसकी सफाई कराई जाएगी।