पानीपत। अभी एनडीसी पोर्टल पर याशी का सर्वे लागू नहीं होगा, क्योंकि निगम ने इसका वैरिफकेशन सर्टिफिकेट अब तक शहरी स्थानीय निकाय को नहीं भेजा है। नव नियुक्त आयुक्त के आने के बाद वे रिपोर्ट को फाइनल करेंगे, जिसके बाद सर्टिफिकेट को निकाय भेजा जाएगा। इसके एक सप्ताह बाद याशी का सर्वे एनडीसी पोर्टल पर अपडेट हो सकेगा। तब तक शहरवासियों को पुराने जीआईएस सर्वे पर ही ऑब्जेक्शन लगाकर प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी बनवानी होगी, जिस पर अधिकारी अपनी रिपोर्ट देंगे। इससे बचने के लिए अधिकारी नई प्रॉपर्टी आईडी वाली फाइलों को दबाकर बैठने लगे हैं। जबकि पेंडिंग एनडीसी की फाइलों को निपटारा किया जा रहा है। इससे शहरवासियों के सामने यह मुसीबत है कि अगर उनकी प्रॉपर्टी आईडी ही नहीं बनेगी तो एनडीसी कैसे लेंगे।
याशी एजेंसी की ओर से शहर का जो सर्वे किया गया था, उसमें 1.73 लाख संपत्तियां थीं। इससे पहले जीआईएस एजेंसी की ओर से जो सर्वे किया गया था, उसमें 1.45 लाख संपत्तियां थीं। याशी का सर्वे जीआईएस सर्वे से मिलान नहीं हो सका। इनका केवल 70 प्रतिशत डेटा ही इंटीग्रेटेड हो सका। बाकी 30 प्रतिशत डेटा का आज तक मिलान नहीं हो पाया है। इससे शहरवासी भी परेशान हैं और निगम के अधिकारी भी। जब तक पूरा डेटा मैच नहीं होगा, तब तक शहर की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
याशी के सर्वे रिपोर्ट के सर्टिफिकेट से मतलब है कि याशी का सर्वे सही हुआ है। इसे निगम ने वेरिफाई कर दिया है। जब निगम याशी के सर्वे का सर्टिफिकेट निकाय को देगा तो निकाय इसे पोर्टल पर अपडेट कर देगा। पोर्टल पर डेटा अपडेट होते ही याशी को किए गए सर्वे का भुगतान कर दिया जाएगा। अब निगम को यह डर है कि अगर याशी को भुगतान कर दिया गया तो जिन संपत्तियों के डेटा में त्रुटि है, उन्हें निगम कैसे ठीक करेगा। हालांकि यह भी तैयारी है कि याशी के कर्मचारियों को पिछली बार की तरह निगम में ही बैठाया जाएगा। जैसे पहले याशी के पास 21 हजार आपत्तियां थीं। इस बार भी आपत्तियां लगाकर इनका समाधान किया जाएगा।
वर्जन-
आयुक्त का इंतजार : निगम
याशी का सर्वे अब तक लागू नहीं हो सका है। चूंकि निगम ने याशी के डेटा का वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट अभी मुख्यालय नहीं भेजा है। इसके लिए पहले निगम आयुक्त इस सर्टिफिकेट की जांच पड़ताल करेंगे और ठीक होने पर ही हस्ताक्षर कर इसे भेजेंगे। तब तक पुराने सर्वे के अनुसार काम होगा। तब तक पेंडिंग फाइलों को निपटाया जा रहा है।
- समयपाल सिंह, जोनल टैक्सेशन ऑफिसर।