फास्ट ट्रैक पॉक्सो अदालत ने सुनाया फैसला, डीएनए और एफएसएल रिपोर्ट समेत 10 गवाहों की गवाही बनी अहम आधार
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। नाबालिग से दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी देने के मामले में फास्ट ट्रैक पॉक्सो अदालत ने दोषी पंकज को 20 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश पीयूष शर्मा की अदालत ने पंकज पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने के निर्देश दिए हैं।
मामला जून 2024 का है। पुराने औद्योगिक थाना क्षेत्र में पीड़िता के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि काबड़ी रोड निवासी पंकज उनकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया था। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने अश्लील वीडियो प्रसारित करने की धमकी देकर पीड़िता के साथ कई बार दुष्कर्म किया। इससे पीड़िता गर्भवती हो गई थी।
आरोप था कि बाद में उसका गर्भपात कराया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी पंकज को गिरफ्तार किया और वैज्ञानिक जांच के लिए डीएनए नमूने व अन्य साक्ष्य एफएसएल भेजे।
डीएनए और एफएसएल रिपोर्ट ने अहम भूमिका निभाई
मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए उसे झूठे मामले में फंसाने और प्रेम प्रसंग से जुड़ी दलीलें दीं। वहीं, अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयान, डीएनए और एफएसएल रिपोर्ट समेत अन्य साक्ष्य अदालत में पेश किए। मामले में कुल 10 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पंकज को दोषी करार दिया।
अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी को 20 वर्ष की कठोर कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत तीन वर्ष की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि दोषी की हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाए।