सिविल अस्पताल में कार्यरत ठेकाकर्मियों ने वेतन न मिलने पर काम छोड़ दिया और ठेकेदार और स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ रोष व्यक्त किया।
ठेका कर्मियों के काम छोड़ने पर अस्पताल की सफाई और सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई। सीएम ने कर्मियों को उचित आश्वासन देकर शांत किया, लेकिन कुछ देर काम करने के बाद फिर से विरोध में खड़े हो गए। ठेका कर्मियों ने शुक्रवार से विरोध तेज करने की चेतावनी दी है।
सिविल अस्पताल के ठेकाकर्मियों ने वीरवार सुबह ही काम छोड़ दिया और वेतन की मांग के लिए ठेकेदार के खिलाफ नारेबाजी की।
वे मेट्रन को साथ लेकर एमएस से मिले और अपनी मांगों को रखा। उन्होंने कहा कि उनको चार माह से वेतन नहीं मिल पाया है और ऐसे में उनका परिवार चला पाना मुश्किल हो गया है। एमएस ने उनको समझाने का प्रयास किया और वे कुछ शांत भी हो गए। इस मौके पर संजय कुमार, अमित, कृष्ण, रविचंद्र, रीना देवी, राजबाला, अमिका और सविता मौजूद रहीं।
एमएस ने ठेकेदार विजेंद्र से फोन पर बात की और उनको कर्मियों की मांगों से अवगत कराया। ठेकेदार ने कहा कि उन्होंने बिल बनाकर विभाग में जमा करा रखे हैं। वे अपनी जेब से पैसे नहीं दे सकते। जिस किसी को काम करना है, करे, नहीं तो जा सकता है। कर्मी ठेकेदार की बात सुनकर भड़क गए।
सभी कर्मी सीएमओ डॉ. इंद्रजीत धनखड़ से मिले और अपनी मांग को रखा। उन्होंने कहा कि वे वेतन के बिना काम नहीं कर सकते और ठेकेदार उनको चार माह से वेतन नहीं दे रहा है। सीएमओ ने उनके नाम की कुछ पेमेंट आने की बात कही और एक माह का वेतन जल्द ही दिलवाने की कही।
उन्होंने कहा कि वे बाकी महीनों का वेतन भी जल्द ही जारी करा देंगे। वे सीएमओ की बातों को मानकर काम पर लौट आए और कुछ देर काम भी किया, लेकिन सभी कर्मी फिर से एकजुट हो गए और शुक्रवार से अनिश्चितकाल के लिए काम छोड़ने का फैसला लिया।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिविल अस्पताल की सुरक्षा और सफाई को निजी हाथों में दिया था और बिजेंद्र सिंह ने इसका ठेका लिया था। सिविल अस्पताल में ठेकेदार के अंतर्गत 55 कर्मी नियुक्त हैं और वीरवार को हड़ताल में 32 कर्मी शामिल रहे। बाकी अपनी शिफ्टों की ड्यूटी कर घर गए थे। कर्मियों के अड़ियल रवैये से सुबह के वक्त सिविल अस्पताल में सफाई तक नहीं हो सकी। इमरजेंसी और दूसरे वार्डों में सुरक्षा के भी प्रबंध नहीं मिले।