पानीपत। मंडियों में अपेक्षाकृत धान की खरीद नहीं हो पा रही है, न ही एजेंसियां धान का उठान कर पा रही हैं। ऐसे में मौसम का मिजाज बदलने पर धरतीपुत्रों की परेशानी बढ़ गई है। खेत से लेकर मंडी तक अपनी गाढ़ी कमाई (धान) को लेकर उनकी चिंता बढ़ गई है। मंडी में खरीद न होने पर रात में ढेरियों के पास रहना पड़ता है। सूनी छोड़ने पर अनाज चोरी होने का डर बना रहता है। इधर खेत में काम ठप हो जाता है। प्रशासन और संबंधित विभाग दावों तक ही सिमटे हैं।
रविवार को मौसम एक बार फिर बदल गया। सुबह आसमान में हल्के बादल छा गए और मध्यम हवा चली। किसान एक बार आसमान और फिर अपनी फसल को देखने लगे। इस समय बारिश होने पर खेतों में खड़ी फसल में जहां नुकसान का खतरा है, वहीं मंडियों में खरीद न होने से लाखों क्विंटल धान खुले में पड़ा है। जिले की मंडियों की बात करें तो अब तक सीजन में 123720 एमटी धान की आवक हुई है। इसमें से 121969 एमटी की खरीद की है। इसमें पीआर किस्म 195444 मीट्रिक टन में से 18032 की खरीद की है, जबकि उठान 11718 मीट्रिक टन का किया गया है। 1509 किस्म के 103614 में से 103400 व बासमती किस्म 562 मीट्रिक टन आया है। इसमें से 537 मीट्रिक टन की खरीद की है। जिले में सरकारी एजेंसियों ने 11718 मीट्रिक टन का उठान किया है। इसमें हैफेड ने 5551 और एचडब्ल्यूसी ने 6167 मीट्रिक टन कर उठान किया है।
मतलौडा निवासी सूरत सिंह, राममेहर और अमित ने बताया कि मंडी में धान की खरीद पर्याप्त नहीं है। पीआर किस्म को एक एजेंसी खरीद रही है। वह भी उठान नहीं कर रही। ऐसे में मंडी में जगह नहीं बन पा रही है। पानीपत अनाजमंडी में एक मिलर धान खरीद रहा था। शनिवार को दबाव पड़ने पर दूसरे मिलर ने खरीद शुरू की। जबकि पानीपत व समालखा मंडी में अपेक्षाकृत अधिक धान की आवक हुई है।
धान खरीद के साथ उठान भी तेजी से किया जा रहा है। सरकारी एजेंसी समय पर खरीद लक्ष्य पूरा करेंगी। प्राइवेट मिलर को भी जरूरी हिदायतें दी गई हैं।
- आदित्य कौशिक, डीएफएससी।