कोरोना संक्रमण से जंग जीत चुकी गांव नौल्था निवासी मंजू अपने गांव के लोगों और पड़ोसियों से हार रही है। उनका आरोप है कि गांव में कुछ लोग उनसे किराए का कमरा खाली करवाने के साथ गांव से निकालना चाहते हैं। कोई पड़ोसी भी उनसे बोलने का तैयार नहीं था। सभी तरफ से केवल उन्हें संदेह भरी निगाहों से देखा जाने लगा है। संक्रमण से ठीक होने के बाद वापस घर आई मंजू को अपने ही घर में मानसिक तौर पर परेशान होकर रहना पड़ा। रविवार शाम को उनके पास सीएम मनोहर लाल ने कॉल कर हालचाल जाना तो उसने गांव के कुछ लोगों की ओर से हो रही यह परेशानी बताई। सीएम ने मंजू को आश्वासन दिया कि वे इस बारे में डीसी से बात करेंगे और उन्हें कोई भी परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
सीएम का आश्वासन तुंरत प्रभाव से रंग लाया। उन्होंने मंजू को गांव में होने वाली असुविधाओं को सुलझाने के लिए डीसी को सख्त दिशा-निर्देश दिए। जिसके बाद डीसी ने तुंरत प्रभाव से एक सरकारी अमला मंजू के घर भेजा। सरकारी अमले ने मौके पर सरपंच व पड़ोसियों को भी बुलाकर समझाया। वहीं, मंजू को आश्वासन दिया कि उन्हें किसी भी प्रकार से कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। अब मंजू के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार की खड़ी हो चुकी है। मंजू का कहना है कि उनके मिल के मालिक से गांव के सभी कर्मचारियों को मिल से निकाल दिया है। जिसका ठीकरा कर्मचारी मंजू के सिर फोड़ रहे हैं। कोरोना से ग्रस्त होने पर मंजू को सभी कर्मचारियों के निकाले का जिम्मेदार माना जा रहा है।
सिर्फ सरपंच ने ही की मदद
मंजू ने बताया कि केवल गांव के सरपंच ने ही उनकी मदद की। सरपंच ने उनके घर तक खाना-पीने व राशन का सामान पहुंचाया था। उसके परिवार के पांच सदस्यों में उनकी सास, पति, एक बेटऱ व बेटी शामिल हैं।
सीएम से बात के बाद तुंरत पहुंचा सरकारी अमला
मंजू ने बताया कि सीएम मनोहर लाल से बातचीत करने के बाद तुंरत प्रभाव से सरकारी अमला उनके घर पर पहुंचा। उनका हालचाल पूछा। गांव या पड़ोसियों की वजह से हो रहीं असुविधाएं भी पूछीं, इसके बाद संबंधित लोगों को हिदायतें भी दी गई। मंजू ने बताया कि रविवार के बाद सोमवार को भी उनके घर सरकारी अमला उनकी देखरेख करने के लिए गया था। इसके लिए मंजू ने सीएम व डीसी का भी आभार व्यक्त किया है।
लगता है अब कोई रोजगार भी नहीं देगा: मंजू
मंजू ने बताया कि उन्हें लगता है कि अब उन्हें कोई नौकरी भी नहीं देगा। अब तक वह मिल में काम कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहीं थीं, लेकिन अब उन्हें अपने रोजगार की चिंता सताने लगी है। उन्होंने जिला प्रशासन व सरकार से लॉकडाउन के बाद रोजगार दिलवाने की गुहार लगाई है।