पानीपत। हरियाणा के देसी खाने में मशहूर चूरमा शनिवार को देश समेत दुनिया के करीब 50 देशों में एक बनाया गया। परिवार के सदस्यों ने एक साथ चूरमा खाकर सूरमा बनने का संदेश दिया। इसके अलावा लोगों से चाऊमीन और पिज्जा बर्गर जैसे फास्ट फूड को त्यागने की अपील की। यह आयोजन लंदन बोरो काउंसलर (जिला परिषद चेयरमैन) रोहित अहलावत के आह्वान पर किया गया।
रोहित अहलावत मूल रूप से हरियाणा के बहादुरगढ़ से हैं। वे लंदन में सात जाट मेले लगा चुके हैं और शनिवार को पहला अंतरराष्ट्रीय चूरमा दिवस मनाया। हरियाणा में अंतरराष्ट्रीय जाट संसद द्वारा यह आयोजन किया गया। जाट संसद के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. नवीन नैन भालसी ने अपने पानीपत के मतलौडा स्थित गंगा हैचरी में चूरमा बनाया। यह आयोजन भारतीय समय अनुसार रात साढे आठ बजे किया गया। उन्होंने बताया कि करीब 50 देशों में यह आयोजन किया गया है। इसके बाद सभी लोग ऑनलाइन जुड़े। उन्होंने चूरमा दिवस पर अपने विचार साझा किए। रोहित अहलावत ने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति के अलग की जलवे हैं। इन्हीं में भारतीय खान-पान की पहचान भी है। खासकर हरियाणा का देसी खाना चूरमा सबसे अलग है। देसी घी का प्रयोग कर चूरमा खाकर हर कोई मजबूत बनता है। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सभ्यता और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
फास्ट फूड त्यागकर देसी खान पान को आगे आए लोग
डॉ. नवीन नैन भालसी ने बताया कि आज हर कोई फास्ट फूड खा रहा है। शादी ब्याह में भी खान पान बदल गया है। पहले मिठाई के स्टॉल पर सबसे लंबी लाइन होती थी। आज फास्ट फूड के स्टॉल पर लाइन लगी है। चिकित्सक भी इनको स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताते हैं। बावजूद इसके युवा पीढ़ी फास्ट फूड को पसंद कर रही है। इनमें जागरूकता लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चूरमा दिवस मनाया गया है। युवा पीढ़ी को अपनी सभ्यता और खान पान को अपनाना होगा।