पानीपत। चैत्र पूर्णिमा व्रत बुधवार को रखा जाएगा। इसके अगले दिन बृहस्पतिवार का व्रत रखा जाएगा। दोनों व्रत में विष्णु और लक्ष्मी पूजन किया जाएगा। इस दिन शाम को चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि व्याप्त रहेगी। हालांकि, स्नान-दान और पूजा के लिए उदयातिथि दो अप्रैल वीरवार को मान्य है। इन दो दिनों में व्रत, स्नान व दान करना फलदायी माना जाता है। यह भगवान विष्णु (बृहस्पति देव) को समर्पित है। चूंकि पूर्णिमा पर भी विष्णु पूजन होता है, इसलिए यह लगातार दो दिन की भक्ति का विशेष अवसर है।
पंडित प्रवीन शास्त्री ने बताया कि पूर्णिमा बुधवार को सुबह 07:07 पर शुरू होगी और वीरवार को सुबह 07:42 तक रहेगी। इसलिए व्रत बुधवार को रखा जाएगा। इस दिन विष्णु भगवान और लक्ष्मी माता का पूजन किया जाएगा। व्रतधारी को कथा के बाद जलपान या चाय पीनी चाहिए। फिर शाम को पूजा व आरती करने के बाद सामक आदि खाना चाहिए। वीरवार को सुबह पूर्णिमा का दान-स्नान किया जाएगा। वीरवार को सत्यनारायण भगवान का व्रत और पूर्णिमा का स्नान होने से यह अधिक फलदायी सिद्ध होगा। लोगों को सत्यनारायण भगवान का पूजन करके तीर्थ स्थानों पर स्नान करना चाहिए इससे व्रतधारी की मनोकामना पूर्ण होती है और व्रत का दोगुना फल मिलता है।
पंडित प्रवीन शास्त्री ने बताया कि इस बार पूर्णिमा व्रत बुधवार को जबकि दान-स्नान वीरवार को किया जाएगा। वीरवार को पूर्णिमा व सत्यनारायण भगवान का पूजन कर दान करना फलदायी सिद्ध होगा। लोगों को पवित्र नदियों व तीर्थ स्थानों पर जाकर स्नान करना चाहिए और अपनी क्षमता व श्रद्धा से दान करना चाहिए। इससे परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है और आर्थिक समस्या से राहत मिलती है।