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Panipat News: ल्यूकेमिया, लिम्फोमा कैंसर की चपेट में बच्चे

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पानीपत। जिले में 150 बच्चे कैंसर ल्यूकेमिया और लिम्फोमा कैंसर की चपेट में है। यह रक्त से संबंधित कैंसर होता है। कैंसर के कुल रोगियों की संख्या में बाल कैंसर रोगियों की संख्या दो प्रतिशत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसका मूल कारण जेनेटिक ही मानते हैं।
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ल्यूकेमिया और लिम्फोमा कैंसर के लगभग 150 बाल रोगियों का बड़ौली गांव स्थित प्रेम कैंसर अस्पताल में इलाज चल रहा है। 16 फरवरी को विश्व बाल कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इस मुख्य उद्देश्य बच्चों को कैंसर से बचाना है।
स्वास्थ्य विभाग के पास अब तक बाल कैंसर मरीजों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। यहां सिर्फ उन कैंसर रोगियों का रिकॉर्ड होता है जिनका रोहतक पीजीआई तक पास बनता है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में लगभग 550 कैंसर रोगी हैं। जबकि निजी कैंसर अस्पताल के मुताबिक यह संख्या लगभग सात हजार है। ल्यूकेमिया और लिम्फोमा का कैंसर एक मिलियन में से 53-55 बच्चों को होता है। प्रेम कैंसर अस्पताल के निदेशक डॉ. अभिनव मुटनेजा ने बताया कि बच्चों में कैंसर आम नहीं है।
कुल कैंसर मरीजों के अनुपात में बाल कैंसर रोगी दो प्रतिशत ही होते हैं। बच्चों में मुख्य रूप से ब्लड कैंसर मिलता है। इसके कारण आज तक स्पष्ट नहीं हैं। यह कई केस में जेनेटिक भी हो सकता है। ब्रेन ट्यूमर कैंसर भी बच्चों के लिए खतरा है।
इसके कारण नहीं पता है इसलिए इसकी समय से पहले रोकथाम भी संभव नहीं है। वैश्विक स्तर पर, बचपन का कैंसर एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या है। ल्यूकेमिया, ब्रेन ट्यूमर और लिम्फोमा बच्चों में होने वाले कैंसर के सबसे आम प्रकारों में से हैं, जिनमें से प्रत्येक के लिए अत्यधिक विशिष्ट उपचार की आवश्यकता होती है। स
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