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Panipat News: निंदा प्रस्ताव, जेई व क्लर्क पर कार्रवाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गूंजा सदन

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पानीपत। नगर निगम सदन की बैठक में बुधवार को निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर जमकर हंगामा हुआ। हंगामे के बीच परिवार पहचान पत्र की आय वेरिफिकेशन करने वाली जिला प्रशासन की लोकल कमेटी और कांग्रेसराज में लोगों को निशुल्क पानी की टंकी बांटने के मामले में निंदा प्रस्ताव लाया गया। इसके अलावा सदन की सिफारिश पर जनप्रतिनिधियों के साथ सही व्यवहार न करने पर निगम के जेई विकास कुमार का वेतन रोकने के साथ नोटिस देने और प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के क्लर्क राकेश कुमार की सीट बदलने के साथ जांच का फैसला लिया गया।
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नगर निगम की बजट बैठक बुधवार को दो बजे मेयर अवनीत कौर की अध्यक्षता में शुरू हुई। इसका संचालन निगम आयुक्त राहुल नरवाल ने किया। सदन करीब ढाई घंटे तक चला। इस दौरान 38 प्रस्ताव पास किए गए।

जेबीएम पर लगा जुर्माना नहीं होगा कम
सदन में जेबीएम का जुर्माना 1.34 करोड़ से घटाकर सिर्फ 27 लाख करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इस पर सदन ने फैसला लिया कि जेबीएम का जुर्माना कम नहीं होगा। इसे बढ़ाया जरूर जा सकता है। इसे कम करना खुद पर सवाल उठाने जैसा होगा। दूसरी ओर शहर में जिन परिवारों की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम होगी, उनके सीवर और पानी के बिल माफ करने का भी प्रस्ताव पास किया गया। शहर में हर वार्ड में 500-500 लाइटें और वार्डवार बेंचों के नए टेंडर पर भी सदन की सहमति बनी। हालांकि विधायक की ओर से भी शहरी विधानसभा के वार्डों में 400-400 लाइटें लगाने का प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन निगम के सभी वार्डों में 500-500 लाइटें लगवाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया। शहर में 100 टाॅवर लाइटें भी लगाई जाएंगी।
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294 करोड़ का बजट लेकर आया निगम
सदन ने निगम के संशोधित बजट को भी पास कर दिया। सदन के बीच अधिकारियों ने 2023-24 की आय का 294 करोड़ और व्यय का 267 करोड़ का बजट रखा, जिस पर सभी ने सहमति दी। जबकि पहले निगम अधिकारियों ने निगम की आय का 279 करोड़ और व्यय का 264 करोड़ का बजट बनाया था, जिसमें कुछ मदों में संशोधन के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे। नगर निगम बरसत रोड स्थित खाली जगह पर एक गोशाला और एक नंदीशाला भी बनाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए एस्टीमेट के आदेश अधिकारियों को दिए गए।

भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर की मांग :
प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रॉपर्टी टैक्स और परिवार पहचान पत्र में आय वेरिफिकेशन जैसे मुद्दों पर पार्षदों ने कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। पार्षदों ने भ्रष्टाचारी कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करने की बात कही। आयुक्त ने लिखित शिकायत मिलने पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए पार्षदों के साथ खुद चलने का भरोसा दिया।
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