समालखा। संत निरंकारी मिशन की शुरुआत आजादी से पहले बूटा सिंह ने 1929 में की थी। इसके बाद यह साल दर साल बढ़ता गया। यह आज वट वृक्ष का रूप ले चुका है। अब सतगुरु माता सुदीक्षा मिशन की छठी और वर्तमान सतगुरु हैं। उनका जन्म 13 मार्च 1985 को बाबा हरदेव सिंह और माता सविंदर हरदेव के घर हुआ था। उन्होंने 2018 में अपनी मां सविंदर हरदेव के निधन के बाद पद संभाला था।
बूटा सिंह ने 1943 में अपना पद अवतार सिंह को सौंपा। 1947 में मिशन की स्थापना दिल्ली में हुई और 1948 में इसका विस्तार किया। पानीपत के समालखा स्थित भोड़वाल माजरी गांव में 2018 में संत निरंकारी समागम का आयोजन किया था। अब करीब 10 लाख श्रद्धालु आते हैं। मिशन ने 1948 से 1962 तक बाबा अवतार सिंह के नेतृत्व में, 1963 से 1979 तक बाबा गुरबचन सिंह के नेतृत्व में और 1980 से बाबा हरदेव सिंह के नेतृत्व में समागम आयोजित किए गए।
भेदभाव तोड़ रहा मिशन
मिशन के को-ऑर्डिनेटर जोगिंदर सुखीजा ने बताया कि संत निरंकारी मिशन एक आध्यात्मिक आंदोलन है। इसका उद्देश्य जाति, धर्म या पंथ के भेदभावों को तोड़ना है। मिशन निराकार ब्रह्म के रूप में ईश्वर की अभिव्यक्ति पर केंद्रित है। जिसे वह हर व्यक्ति के अंदर देखता है। मिशन का लक्ष्य मानव एकता और प्रेम को बढ़ावा देना है, जो हर व्यक्ति को दूसरों के प्रति सेवा और करुणा की भावना से जोड़ता है। संवाद