पानीपत/सनौली। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश से यमुना उफान पर है। यह चेतावनी के निशान को पार कर गई है। इससे यमुना के तटीय क्षेत्र में 20 हजार एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। 17 गांवों के सैकड़ों किसान इससे चिंतित हैं। किसानों को पानी से गुजरकर ही अपने खेतों में जाना पड़ रहा है। अगर दो दिन भी फसल में ऐसे ही पानी लगा रहा तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। प्रशासन किसानों की डूबी फसल का आकलन कर रहा है। हथिनीकुंड बैराज से सोमवार को यमुना में 2.58 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से बाढ़ की चिंता बढ़ गई है। यह पानी मंगलवार दोपहर तक पानीपत क्षेत्र में प्रवेश कर जाएगा।
हथिनीकुंड बैराज से रविवार को छोड़ा 1.45 लाख क्यूसेक पानी सोमवार शाम को पानीपत पहुंच गया। इससे यमुना में उफान आ गया। यहां जलस्तर में दो मीटर से अधिक की वृद्धि हो गई। इसके बाद 228.95 मीटर से जलस्तर बढ़कर सोमवार शाम को 231.15 मीटर पहुंच गया। चेतावनी बिंदु 210 मीटर को काफी पहले पार कर चुकी यमुना अब किसी भी समय खतरे का निशान 231.500 मीटर भी पार कर सकती है। अब यमुना खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। तटवर्ती इलाके के किसानों व बाशिंदों की चिंता बढ़ चुकी है। प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार यमुना का निरीक्षण कर रहे हैं।
बाढ़ चाैकियां अलर्ट -
यमुना बार्डर से लगते यमुना पुल, रामड़ा-आर, राणा माजरा, खोजकीपुर में अलर्ट किया गया है। यहां बाढ़ नियंत्रण को लेकर पटवारी व ग्राम सचिव की ड्यूटी लगाई है। बाढ़ चौकियों को हाई अलर्ट कर दिया गया है। तटवर्ती किसानों को भी चौकन्ना रहने को कहा गया है। यमुना नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से प्रशासन ने सनौली यमुना घाट पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में यमुना घाट पर शिवभक्त कांवड़िए स्नान कर रहे हैं। यहां फल्ड पीएसी के जवानों को निर्देशित किया है। किसी भी कांवड़ियों को बैरिकेडिंग से बाहर स्नान न करने की हिदायत दी है।
20 हजार एकड़ फसल डूबी-
किसानों के अनुसार राणामाजरा, पत्थरगढ़, नवादा आर, नवादा पार, गढ़ी बेसिक, जलालपुर, तामशाबाद, सनौली खुर्द, रामड़ा आर, नन्हेड़ा, रिशपुर, अधमी, जलमाणा, गोयला खुर्द, मिर्जापुर, गोयला कलां, खोजकीपुर गांवों के सैकड़ों किसानों की 20 हजार एकड़ में गन्ना, धान और सब्जी समेत हरे चारे की फसलें डूब गई हैं।
वर्जन-
यमुना का पानी अभी नियंत्रण में है। बाढ़ से निपटने के लिए मिट्टी के कटावों पर कट्टे रखे जा रहे हैं। यमुना का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। बाढ़ से बचाव के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
- सुरेश सैनी, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।