पानीपत। कव्वालों ने बू अली शाह मस्त कलंदर तेरे दर पै मैं वारी-वारी जावां..., तेरा कर्म का समंदर, तेरे दर पै मैं वारी-वारी जावां... और दमा दम मस्त कलंदर...कव्वाली की प्रस्तुति दी तो हर कोई मस्ती में झूम उठा। कव्वालों ने देर रात तक कव्वालियों में समा बांधे रखा।
शुक्रवार को मौका रहा दरगाह शाह शरफुदीन बू अली शाह कलंदर पानीपत में एक दिवसीय 725वां सालाना उर्स मुबारक का। रमजान के 11वें रोजे के दिन उर्स मुबारक मनाया गया। मुज्जफरनगर, दिल्ली और पंजाब से आए प्रमुख कव्वालों ने कव्वाली कही। रियाज अहमद वारसी ने शाम को कव्वाली की शुरुआत की। इसके बाद कव्वालों ने देर रात तक एक से बेहतर एक कव्वाली की प्रस्तुति दी। कव्वाली में समुदाय के लोग झूम उठे। इससे पहले दोपहर व शाम को नमाज पढ़ी। इसके बाद सामूहिक रोजा इफ्तार की गई। जिसमें समुदाय के सैकड़ों लोगों ने सामूहिक रूप से रोजा इफ्तार की। दरगाह कलंदर साहब में उत्तर प्रदेश, राजस्थान व दिल्ली से अकीदतमंद और जायरीन पहुंचे। उन्होंने यहां दरगाह में माथा टेका और मन्नत मांगी। इसके साथ चादरपोशी और गुल पोशी की। इस दौरान समाज के हर वर्ग के लोग पहुंचे और कलंदर दरगाह में अपना माथा टेका।
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दूसरे जुमे की नमाज पढ़ी
शुक्रवार को रमजान महीने का दूसरा जुमा रहा। शहर की प्रमुख मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ी। समुदाय के लोगों ने मस्जिद में भीड़ को नियंत्रण करने के लिए दो अलग-अलग समय में नमाज पढ़ी। दोपहर को 12 बजे समुदाय के लोगों का मस्जिदों में पहुंचना शुरू हो गया। दोपहर बाद 1:20 और 2:05 पर अलग-अलग समय में जुमे की नमाज कराई गई। ईदगाह कॉलोनी स्थित मस्जिद के मौलवी सादिक ने बताया कि रमजान महीना बड़ा पवित्र माना जाता है। इस महीने में व्यक्ति को अपने शरीर की भी कीमत तय कर दान करना होता है। रमजान में जुमे की नमाज विशेष स्थान रखती है।