पानीपत। धागे की कीमत में 30 प्रतिशत तक की गिरावट से उद्यमी सप्ताह में दो दिन धागा मिल बंद रख रहे हैं। इससे धागा उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की कमी आई है। इसका सीधा प्रभाव कंबल और बेडसीट उद्योगों पर पड़ रहा है, जबकि ये कंबल उत्पादन का पीक सीजन है। सितंबर तक ये सीजन पीक पर रहेगा। अगर धागे की कीमत और गिरती है तो उद्यमी उद्योगों को बंद करने के दिन और बढ़ा सकते हैं।
दरअसल, अमेरिका में महंगाई, जर्मनी में मंदी और रूस-यूक्रेन युद्ध से धागे का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। अब अमेरिका व यूरोप में टेक्सटाइल उत्पादों की मांग न के बराबर रह गई है। इसके अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पानीपत में अप्रैल तक प्रतिदिन धागे का उत्पादन 20 लाख किलोग्राम था। अब ये 12-15 लाख के बीच हो चुका है। कारण कि जिले के करीब 250 धागा उद्योग अब एक शिफ्ट में ही चल रहे हैं। धागे की कीमत भी 110 रुपये से घटकर 85 रुपये पर आ गई है।
विदित हो कि पानीपत ने 2022 में टेक्सटाइल के साथ-साथ धागा उत्पादन में भी कीर्तिमान स्थापित किया था। पानीपत ने 20 लाख किलोग्राम धागे का प्रतिदिन उत्पादन कर इटली को पीछे छोड़ दिया था। धागा उद्योग में आई क्रांति से उद्योगपतियों ने भी अपने उद्योगों को कंबल या बेडसीट से धागे में स्थानांतरित कर लिया था, जिससे पिछले चार साल में धागा उद्योग 50 प्रतिशत बढ़े हैं, लेकिन अब यहां का धागा उद्योग संकट से जूझ रहा है।
पानीपत इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और नॉर्दन इंडिया रोलर स्पिनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रीतम सिंह सचदेवा ने कहा कि अब धागा उत्पादन महज 60-70 फीसदी रह गया है। टेक्सटाइल उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मार्केट में मांग नहीं है। इसका सीधा प्रभाव कंबल व बेडसीट उद्योगों पर पड़ रहा है। इन उद्योगों में भी उत्पादन 25-30 प्रतिशत कम हो गया है। अगर अब धागे के दाम और गिरे तो उद्योगों को और दिन भी बंद करना पड़ सकता है।