मौसम के पहले घने कोहरे ने बिजली निगम के प्रबंधों की पोल खोल दी और एक ही रात में जिले के पांच पावर हाउस ब्रेक डाउन हो गए। जिसके चलते आधे शहर व आधे ग्रामीण क्षेत्र की बत्ती गुल होने से ब्लैक आउट की स्थिति रही। करीब छह घंटे बिजली न आने से जिला वासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कोहरे के कारण बिजली निगम कर्मचारियों को फाल्ट ढूंढने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। चार पावर हाउस का तो कोई भी फाल्ट नहीं मिला, जबकि एक पावर हाउस पर इंसोलेटर डिस्क पंक्चर से ब्रेक डाउन होना पाया गया।
शुक्रवार अल सुबह करीब साढ़े तीन बजे घने कोहरे के चलते एक के बाद पावर हाउस ब्रेक डाउन होने लगे और कुछ ही देर में पांच पावर हाउस ब्रेक डाउन हो गए। सेक्टर 13/17 के 33केवी पावर हाउस सुबह चार बजकर 45 मिनट पर ब्रेक डाउन हो गया। इससे शहर में सेक्टर 13/17, 18, नूरवाला, सब्जी मंडी फीडर, तहसील कैंप एरिया में करीब छह घंटे बत्ती गुल रही। कोहरे के कारण कर्मचारी कई घंटे के बाद फाल्ट ढूंढ पाए, यहां पर इंसोलेटर डिस्क में पंक्चर मिला। इसे लगाने के बाद ही बिजली आपूर्ति की गई।
इसी दौरान सुबह तीन बजे 33 केवी नरायणा पावर हाउस पर ब्रेक डाउन हुआ। इससे नरायणा, मनाना, गवालड़ा, ढोडपुर, ढिंडार व इन गांवों के खेतों में 11 बजकर 12 मिनट तक बिजली गुल रही। इसी तरह गांव सनौली स्थित 33केवी पावर हाउस पर सुबह साढ़े तीन से 12 बजकर 15 मिनट तक ब्रेक डाउन रहा। इससे गांव सनौली कलां के ग्रामीणों के साथ-साथ राणा माजरा, धनसौली व गांव गढ़ी बेसक के खेतों को लाइट नहीं मिल पाई। इसी अवधि में सुबह सात बजे से 10 बजकर 10 मिनट तक गांव सिवाह के 33केवी पावर हाउस ब्रेक डाउन रहा।
इससे गांव सिवाह, दीवाना, नांगला खेड़ी, पसीना खुर्द, संजय चौक फीडर एरिया व इन क्षेत्रों से जुड़े खेतों को बिजली नहीं मिल पाई। डाहर 33केवी पावर हाउस भी पौने आठ बजे से 10 बजकर आठ मिनट तक बंद रहा। इससे डाहर गांव, विकास गर्ग एमके स्पीन एरिया व इनके खेत प्रभावित हुए। इन चारों पावर हाउस पर कोई भी फाल्ट नहीं मिला।
ऐसे बनती है ब्रेक डाउन की स्थिति
पानीपत जिले में करीब 48 पावर हाउस हैं। यहां करीब दो लाख 51 हजार बिजली के कनेक्शन हैं। इनसे करीब 16 हजार ट्रांसफार्मर जुड़े हैं। तीन हजार नौ किलोमीटर एचटी व करीब 5600 किलोमीटर लंबी एलटी लाइन हैं। सेवानिवृत्त एक्सईएन एडी चराया ने बताया कि धुंध के सीजन में तारों पर धुंध जमा होते ही फाल्ट आ जाता है। जैसे ही धुंध खत्म होती है फिर से लाइनें चल जाती हैं।
स्पार्किंग के चलते पानी की बूंद लगते ही ब्रेक डाउन की स्थिति पैदा हो जाती है। कई बार तारों में कट होते हैं। उन पर पानी लगने से भी इस तरह की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने बताया कि यदि समय-समय पर तारों की सही मेंटेनेंस की जाए तो इस तरह की समस्या से बचा जा सकता है। साथ ही तारों की सफाई भी समय-समय पर नहीं हो पाती।
बिजली की परेशानी से यह रही दिक्कतें, यूं बोले लोग
वीरवार को भी पांच छह घंटे लाइट नहीं आई। शुक्रवार उठे तो भी लाइट नहीं थी। न पीने को ताजा पानी मिल सका न ही कोई काम हो सके।
किशन लाल सलूजा, रामनगर
रोज का इनका यहीं काम हो गया है। कभी कुछ तो कभी कुछ। आज भी सुबह से लेकर दोपहर तक लाइट नहीं थी। न गर्म पानी कर सके न अपना कोई दूसरा काम।
उत्तम चंद, तहसील कैंप निवासी
बिजली के बिल तो ये लोग पूरे लेते हैं, लेकिन बिजली कितने देते हैं यह तो कोई इनसे पूछे। रोजाना कभी किसी बात का तो कभी किसी बात के कारण बिजली नहीं आती।
प्रीतम बतरा, प्रधान फतेहपुरी बिरादरी
सुबह उठे तो बिजली नहीं थी। सोचा थोड़ी बहुत देर में आ जाएगी लेकिन दोपहर तक बिजली नहीं आई। दोपहर तक बिना नहाए धोए बैठना पड़ा।
केसर बजाज, जवाहर नगर
वर्जन
लाइनों की समय-समय पर सही तरीके से मेंटेनेंस की जाती है। मौसम बदलने से कई बार पानी की बूंद लगने से ब्रेक डाउन हो जाता है। फाल्ट को दूर कर बिजली आपूर्ति कर दी गई।
बीएस गर्ग, एससी बिजली निगम, पानीपत सर्कल