संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। माॅडल टाउन के श्री सनातन धर्म मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि धर्म एवं अपनी संस्कृति को बचाने के लिए यदि मनुष्य को अपने प्राणों का बलिदान भी देना पड़े तो यह किसी भक्त और श्रद्धा से कम नहीं है। क्योंकि यदि धर्म और संस्कृति नहीं रही तो ऐसा जीवन जीने का क्या लाभ। धर्म और संस्कृति ही जीवन को सतमार्ग के लिए ले जाती है। धर्म नीति बनाते हैं और संस्कृति उसको संजोकर रखती है। इसलिए धर्म और संस्कृति जीवन के दो पहिए हैं जिनके आधार पर ही हम अपना जीवन जिए तो कल हमारा बेहतर होगा।
उन्होंनेने कहा कि कलयुग में भागवत कथा साक्षात श्री हरि का स्वरूप है। इस कथा को सुनने के लिए देवी-देवता भी तरसते हैं, परंतु दुर्लभ मानव प्राणी को यह कथा सहित भी प्राप्त हो जाती है क्योंकि यदि भगवान किसी से सर्वाधिक स्नेह करते हैं तो वह मानव रूपी अपने भक्तों को करते हैंं। मानव जीवन तभी धन्य होता है, जब वह कथा स्मरण का लाभ प्राप्त कर लेता है।
सत्संग एवं कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है वरना वह इस संसार में आकर मोह माया के चक्कर में पड़कर अपना मानव जीवन जो अश्वमेध यज्ञ के समान होता है, उसको व्यर्थ में ही निकाल देता है। मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद् भागवत कथा का सिमरन अवश्य करना चाहिए। बच्चों को यदि संस्कारवान बनाना है तो सत्संग का द्वार जरूर दिखाना पड़ेगा। उन्होंने राजा परीक्षित के कथा सार का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा एवं सत्संग ही सत्य का आचरण है।
श्री सनातन धर्म मंदिर सभा के प्रधान तरुण गांधी ने भागवत कथा के उपरांत प्रसाद वितरण किया एवं मंगल आरती की। उन्होंने व्यास मंच पर विराजमान राधे-राधे महाराज से आशीर्वाद लिया एवं संगीतकारों के संगीत पर खूब नृत्य किया। प्रधान तरुण गांधी ने आए हुए श्रद्धालुओं को सम्मानित किया। इस अवसर मुख्य यजमान ईश्वर गोयल, रामकुमार गोयल, मुकेश गोयल, गौरव गोयल, संत कुमार गोयल, मदन डूडेजा, तिलक मिगलानी, ओम प्रकाश विरमानी आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।