दीपेन्द्र कुमार
पानीपत। बेटियों का बचपन शादी के फेरों में उलझ रहा है। 15 साल से भी कम उम्र में शादी के मामले तेजी से बढ़े हैं। 15 दिन में तीन के छोटी उम्र में बच्चों को जन्म देने के मामले सामने आ चुके हैं जिनमें दो का बाल विवाह किया था और एक यौन शोषण का शिकार थी। कम उम्र में मां बनने के कारण उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। जिले में बाल विवाह के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं।
पिछते तीन साल में 95 मामले सामने आए हैं। महिला एवं बाल कल्याण संरक्षण विभाग के रिकार्ड की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। वर्ष 2022-23 में जिले में बाल विवाह की 30 शिकायतें प्राप्त हुई थी। वर्ष 2023-24 में 25 मामले सामने आए थे। लेकिन,वर्ष 2024-25 में एक बार फिर से विभाग के पास 40 मामले पहुंचे थे। इन मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए बाल विवाह को रोका गया था।
इनमें से 19 मामलों की सूचना फोन से विभाग को मिली थी। वहीं 10 मामले विभाग ने स्वयं ट्रेस किए थे। महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी द्वारा 16 मामलों में एफआईआर दर्ज कराई थी। हालांकि, वर्ष 2025-26 में जून माह तक मात्र चार मामले ही सामने आये हैं।
15 दिन में 15 साल से कम उम्र की तीन किशोरियों ने बच्चों को जन्म दिया है। बाल विवाह का शिकार 14 साल की किशोरी ने चार जुलाई को एक बच्चे को जन्म दिया था। 13 साल की उम्र में परिवार वालों ने उसका विवाह कर दिया था। वहीं उसी दिन यौन उत्पीड़न की शिकार किशोरी ने भी चार जुलाई को एक बेटे को जन्म दिया था। इस दोनों मामलों में बाल कल्याण समिति द्वारा संज्ञान लेकर कार्रवाई कराई गई थी।
तीन दिन पहले भी एक 15 साल की किशोरी ने बच्चे को जन्म दिया। किशोरी ने एक साल पहले एक किशोर से प्रेम विवाह किया था। पानीपत औद्योगिक रूप से समृद्ध जिला है। यहां पर बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक फैक्टरियों में काम करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक चार से पांच लाख मजदूर यूपी, बिहार, झारखंड़, वेस्ट बंगाल से पानीपत में आकर बसे हैं।
परिवार में महिला और पुरुष दोनों मजदूरी करते हैं। जिस कारण बच्चों की शिक्षा पर उनका ध्यान नहीं है। जागरूकता और जल्द ही बच्चों की जिम्मेदारी पूरी करने के चक्कर में वे कम उम्र में ही बच्चियों का विवाह कर देते हैं।