पानीपत। अब सर्दियों में बच्चों में निमोनिया का खतरा बढ़ गया। बच्चों को इस खतरे से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पांच साल तक के बच्चों के लिए सोशल अवेयरनेस एंड एक्शन टू न्यूट्रीलाइज निमोनिया सक्सेजफुली (सांस) अभियान शुरू किया है।
अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता डोर टू डोर जाकर निमोनिया से ग्रस्त बच्चों को चिह्नित कर रही हैं। उन्हें नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए भिजवा रही है।। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर भी रोगियों को निमोनिया के खिलाफ जागरूक कर रहे हैं। इसके लिए डॉक्टरों व नर्सिंग ऑफिसर को प्रशिक्षण दिया गया है। अब नागरिक अस्पताल में लोगों को निमोनिया के खिलाफ जागरूक करने के लिए स्थायी शिविर लगाया है।
यहां आने वाले लोगों को निमोनिया की जानकारी दी जा रही है। हर साल औसतन पांच साल तक के आठ- दस बच्चों की निमोनिया से मौत हो जाती है। निमोनिया को अन्य संक्रामक बीमारियों से घातक माना गया है। 28 फरवरी तक निमोनिया नहीं तो बचपन सही के नारे के साथ ये अभियान चलेगा।
बच्चों की ओपीडी 100 से अधिक
नागरिक अस्पताल में सर्दियों के शुरू होने के बाद बाल रोग संबंधी ओपीडी 100 से अधिक हो चुकी है। इनमें खांसी, जुकाम और बुखार से ग्रस्त बच्चे पहुंचे रहे हैं। खांसी के कारण पसलियों में भी दर्द हो रहा है। नागरिक अस्पताल में दो शिशु रोग विशेषज्ञ ओपीडी कर रहे हैं।
निमोनिया से मृत्यु अन्य संक्रमण रोगों से अधिक
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.आलोक जैन ने बताया कि बच्चों में निमोनिया के कारण होने वाली मृत्यु अन्य संक्रामक रोगों से होने वाली मृत्यु की तुलना में काफी अधिक है। जिसके सामान्य लक्षण खांसी-सर्दी, बुखार, तेजी से सांस लेना, पसलियों का अंदर धसना है। निमोनिया के कारण कुपोषण, स्वच्छ पेयजल की कमी, स्वच्छता व सही स्वास्थ्य देखभाल मुख्य कारक हैं। जिससे समय पर लक्षणों की पहचान कर तुरंत उपचार शुरू किया जाए।
अभिभावकों में निमोनिया से बचाव को लेकर जागरूकता आने से बच्चों को इससे बचाया जा सकता है। निमोनिया से बच्चों की सुरक्षा के लिए पहले छह माह में शिशु को केवल स्तनपान करवाना, छह माह बाद पूरक पोषाहार देना, विटामिन ए की खुराक देना, निमोनिया से बचाव के लिए बच्चों का टीकाकरण करवाना जरूरी है।
वर्जन
निमोनिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। इसके लिए सांस अभियान भी चलाया गया है। नागरिक अस्पताल में स्थायी शिविर भी लगाया है। डॉक्टर भी रोगियों को निमोनिया के खिलाफ जागरूक कर रहे हैं। कर्मचारियों की निमोनिया को लेकर अलग अलग ड्यूटी लगाई गई है।
डॉ. जयंत आहूजा, जिला सिविल सर्जन।