पानीपत। सर्दी के साथ धुंध लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले तीन दिन में अधिकतम तापमान व न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को भी लगातार मौसम की दूसरी घनी धुंध रही। सुबह शाम दृश्यता 10 मीटर से भी कम रही।
सुबह 10 बजे तक धुंध में वाहन रेंग रेंगकर चले। कई जगह वाहन आपस में टकरा गए। धुंध के साथ हवा की रफ्तार ने कंपकंपी चढ़ा दी है। मंगलवार को दिन का अधिकतम तापमान 16 डिग्री दर्ज किया गया है। रात का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया है। हवा की रफ्तार 10 किलोमीटर प्रतिघंटा है जिससे ठंड बढ़ रही है और ठिठुरन महसूस हो रही है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, रविवार तक सुबह शाम कोहरा छाए रहने की उम्मीद है। ठंड और बढ़ेगी दिन रात का तापमान और गिरेगा। फिलहाल मौसम में ऐसे ही उतार- चढ़ाव देखने को मिलते रहेंगे। इस बात की प्रबल संभावना है कि आने वाले एक सप्ताह में मौसम शुष्क रहेगा। मौसम विभाग ने धुंध को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट भी जारी कर दिया है।
धुंध के साथ हवा भी खराब
धुंध के साथ पानीपत की हवा भी तीन दिन से बेहद खराब है। रविवार को शहर का एक्यूआई बढ़कर 298, सोमवार को 261 व मंगलवार को 200 दर्ज किया गया है। प्रशासन ग्रैप तीन के तहत सख्ती से काम नहीं कर रहा है।
ठंड पड़ रही शरीर पर भारी
ठंड शुरू होते ही निमोनिया के मरीज भी बढ़ गए हैं। नागरिक अस्पताल में निमोनिया के लक्षण वाले प्रतिदिन पांच-छह मरीज आ रहे हैं। बुखार, खांसी और जुकाम से ग्रस्त लोगों की प्रतिदिन 100 से अधिक ओपीडी हो रही है। डॉक्टर लोगों को गर्म वस्त्र पहनने के साथ साथ ठंड से बचने की सलाह भी दे रहे हैं।
वाहनों पर रिफलेक्टर लगाने का अभियान जारी
कोहरे में अकसर सड़क हादसे बढ़ जाते हैं। कोहरे में दृश्यता कम होने से हादसे होते हैं। हादसों का मुख्य कारण ट्रैक्टर ट्राॅली और बग्गी होती है, क्योंकि ट्राली और बग्गी पर रिफलेक्टर नहीं होते। कोहरे में इनके पीछे चल रहा वाहन चालक इनको देख नहीं पाता और वाहन आपस में टकरा जाते हैं। यातायात पुलिस अब वाहनों पर रिफलेक्टर लगाने का अभियान चला रही है।
ठंड गेहूं की फसल के लिए बेहतर : कृषि वैज्ञानिक
तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। ठंड बढ़ गई है। धुंध गेहूं की फसल के लिए बेहद लाभदायक है। आने वाले दिनों में कोहरा भी होगा। ये गेहूं की फसल के लिए बेहतर है। ठंड से गेहूं में फूट और बढ़वार होगी। इस वक्त बारिश की संभावना नहीं है।
डॉ. राजबीर गर्ग, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, उझा