पानीपत। आचार्य श्रुत सागर महाराज का शुक्रवार को स्थानीय कायस्थान मोहल्ला स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर दुंदीवालान में मंगल प्रवेश हुआ। लोगों ने आचार्य की मंगल अगवानी की और मंदिर के मुख्य द्वार महाआरती व चरणों का पाद प्रक्षालन किया। आचार्य ने भगवान का अभिषेक व शांति धारा की।
आचार्य श्रुत सागर महाराज ने कहा कि जैन धर्म सबसे प्राचीन धर्म है और इसका सबसे बड़ा प्रमाण हमारे प्राचीन मंदिरों और प्राचीन प्रतिमाओं से मिलता है। वे आज इस मंदिर में आए हैं। यहां विराजमान मूल प्रतिमा भगवान पारसनाथ की सैकड़ो वर्ष पुरानी है। जगह-जगह खोदाई में जैन प्रतिमाओं का मिलना आम बात है। उन्होंने बताया कि जैन धर्म पुण्य योग से प्राप्त होता है, क्योंकि जैन धर्म में सदैव अहिंसा की बात की जाती है।
यहां जीव प्राणी मात्र की रक्षा की बात होती है। आज का भौतिक युग तीसरे विश्व युद्ध की और बढ़ रहा है और ऐसे समय में जैन धर्म के तीर्थंकरों की वाणी इस महाविनाश को रोक सकती है। इसलिए कहा भी जाता है वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा जो मंदिर 100 वर्ष प्राचीन हो जाते हैं, वह अपने आप अतिश्यकारी बन जाते हैं, क्योंकि 100 वर्षों से लगातार वहां भगवान की पूजन पाठ हो रहा है। भक्तों की श्रद्धा जोड़ रही है इसलिए पानीपत जैन समाज द्वारा स्थापित प्राचीन मंदिर सभी अतिश्यकारी हैं सभी प्रतिमाएं अति प्राचीन हैं। दिगंबर जैन पंचायत के प्रबंधक मुकेश जैन ने बताया कि श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर के प्रांगण में भव्य बेदी प्रतिष्ठा का कार्यक्रम चार मई शनिवार को शुरू होगा। तीन दिवसीय महोत्सव में पूरा जैन समाज सम्मिलित होगा। शनिवार को घट यात्रा के माध्यम से इस महोत्सव की शुरुआत होगी। महिलाएं व पुरुष सभी घाट यात्रा में शामिल होंगे। सभी लोग इंद्र इंद्राणी के रूप में प्रभु की पूजन आराधना करेंगे। सचिव मनोज जैन ने बताया की रविवार को भव्य रूप से भगवान के पूजन विधान का आयोजन होगा और सोमवार को भगवान पारसनाथ नई वेदी पर विराजमान होगा। उन्होंने बताया कि पानीपत में विशेष रूप से भगवान पारसनाथ बड़ी मूर्ति से सभी की आस्था जुड़ी हुई है। एडवोकेट मेहुल जैन ने बताया कि यह त्रिदिवसीय कार्यक्रम आचार्य श्रुत सागर महाराज और बाल ब्रह्मचारी मां कौशल के सानिध्य में होगा। इस अवसर पर कुलदीप जैन, सुरेश जैन, दिनेश जैन, मुकेश जैन, मनोज जैन, सुशील जैन, संदीप जैन, नरेंद्र जैन, विभोर जैन व राजीव जैन मौजूद रहे।