सीएमओ को ज्ञापन पत्र देती आशा वर्कर्स यूनियन की महिलाएं। स्रोत : सोशल मीडिया
पानीपत। राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी फेडरेशन के संयुक्त आह्वान पर आशा वर्कर्स यूनियन नौ जुलाई की देशव्यापी हड़ताल में शामिल होगी। यूनियन नेताओं ने शुक्रवार को सीएमओ डॉ. विजय मलिक को महानिदेशक के नाम ज्ञापन सौंपा।
यूनियन की नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दे और जब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिले तब तक न्यूनतम वेतन मासिक 26 हजार रुपये दिया जाए। मासिक मानदेय प्रति महीने 10 तारीख तक महंगाई भत्ते के साथ जोड़कर बैंक खाते में भेजना सुनिश्चित किया जाए। 46वें श्रम सम्मेलन की सिफारिश के अनुसार पेंशन 10 हजार रुपये ग्रेच्युटी, पीएफ और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए। पिछले लगभग आठ महीने से केंद्र सरकार से आने वाली मानदेय की राशि बजट न आने के कारण नहीं मिली है और हरियाणा सरकार के बजट से मिलने वाली मानदेय की राशि भी चार से पांच महीने तक नहीं मिली है। इसका तुरंत भुगतान किया जाए।
आशा कर्मियों के लिए छह महीने का मातृत्व अवकाश और 20 दिन की आवश्यक और चिकित्सा अवकाश सुनिश्चित किए जाएं। सभी सरकारी अस्पतालों, पीएचसी और सीएचसी में आशा वर्करों के लिए विश्राम गृह उपलब्ध करवाए जाएं, फील्ड के अंदर ड्यूटी करने के लिए स्कूटी दी जाए और यात्रा भत्ता खर्च दिया जाए। मिड डे मील वर्करों ने अपनी मांगों के लिए जिला शिक्षा मौलिक अधिकारी को लिखित हड़ताल का ज्ञापन दिया।
ज्ञापन में मुख्य मांगें हैं कि न्यूनतम वेतन मासिक 26 हजार रुपये दिया जाए और वेतन 12 महीने मिले। वर्करों को सफाई कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। सीटू की जिला कमेटी की ओर से श्रम आयुक्त को हड़ताल का नोटिस दिया है। वे चार लेबर कोड रद्द करने, ठेकेदारी प्रथा खत्म करने, स्थायी रोजगार व उद्योगों में श्रम कानून को शक्ति से लागू करने की मांग कर रहे हैं।