स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने कहा कि बुखार होना आम बात है। लगातार तीन दिन तक उसको बुखार व दस्त जैसी समस्याएं रहीं। आठ फरवरी को कविता की हालत अधिक बिगड़ गई। वो उसको लेकर असंध रोड स्थित एक निजी अस्पताल में गए। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने कहा कि कविता की हालत अधिक खराब हो चुकी है।
उन्होंने उसे बड़े अस्पताल में ले जाने की सलाह दी। उसका बीपी बहुत अधिक कम हो गया था। उन्होंने सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा को इसकी सूचना दी थी। इसके बाद गुरुवार को रोहतक पीजीआई से इस मामले की जांच करने एक टीम आई। टीम ने कविता के परिजनों से बातचीत की और उसकी हिस्ट्री भी जानी।
टीम ने इलाज के बारे में भी पूछताछ की। इलाज स्थिति के अनुसार सही पाया गया। शुक्रवार दोपहर को एक बजे कविता ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि कविता की मौत का जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग है। वहीं विभाग को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
कविता की मां कृष्णा निवासी गांव जयजी (सोनीपत) ने बताया कि वो तीन बेटियों व दो बेटों की मां है। कविता दो फरवरी को अपने मायके में आई थी। कविता ने उसको कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार कोरोना वैक्सीन लगाने के मैसेज आ रहे हैं लेकिन वो वैक्सीन नहीं लगवाना चाहती। दबाव में उसको वैक्सीन लगवानी पड़ेगी। उसने कविता को कहा था कि अगर जबरदस्ती इंजेक्शन लगाए तो नौकरी छोड़ देना।
मां वैक्सीन लगवाने से पहले डरी हुई थी
कविता की बेटी साक्षी ने बताया कि वैक्सीन लगवाने से पहले उसकी मां कविता काफी डरी थी। लगातार वो वैक्सीन लगवाने से मना भी कर रही थी। जिस दिन उसकी मां वैक्सीन लगवाकर घर आई उसी शाम को वो बीमार हो गई। उसकी मां ने बताया था कि वैक्सीन लगने के बाद ही उसको बेचैनी शुरू हो गई थी। उसकी मां को चार जनवरी को बार-बार फोन कर अहर सीएचसी में बुलाया गया था।
कविता को किडनी में पथरी थी, मामले की जांच चल रही है : डॉ. वर्मा
कविता को पहले से किडनी में पथरी थी। रोहतक टीम ने भी मामले की जांच की है। शव के पोस्टमार्टम के बाद उसकी मौत के कारण स्पष्ट होंगे। अब तक कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट का कोई मामला नहीं आया है। वो भी लगातार कविता के स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे थे। उसकी दो दिन पहले कोरोना जांच भी की गई थी। उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। डॉ. संतलाल वर्मा, सिविल सर्जन पानीपत।