पानीपत। अब हवा की रफ्तार तेज होने व पराली जलने की घटनाएं लगभग बंद होने से पर्यावरण के स्तर में सुधार हो रहा है। पिछले चार दिन से एक्यूआई लगातार गिर रहा है। रविवार का एयर क्वालिटी इंडेक्स पिछले 36 दिन में अपने सबसे निचले स्तर पर रहा है। रविवार को पानीपत का एक्यूआई 136 दर्ज किया गया है। इससे पहले 25 अक्तूबर को 130 दर्ज किया गया था। अब हवा में धुएं की मात्रा बेहद कम हो गई है। हवा चलने से स्मॉग की चादर टूट गई है। इसलिए धूल के कण ऊपर उठ रहे हैं और स्मॉग नहीं बन रही। इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ काफी हद तक कम हुई है।
स्मॉग की चादर टूटने से नेत्र रोग संबंधी ओपीडी में भी कमी आई। पिछले मंगलवार तक जिला नागरिक अस्पताल की नेत्र संबंधी ओपीडी 200 से अधिक थी। बुधवार के बाद यह ओपीडी कम हुई है। अब लगभग 150 की औसत से ओपीडी हो रही है। स्मॉग के कारण आंखों में जलन, लाली व सूजन जैसी समस्याएं बढ़ रही थी। अब अस्थमा संबंधी ओपीडी भी लगातार कम हो रही है। मंगलवार से हवा की रफ्तार बढ़ी है। पिछले हवा की रफ्तार पांच से छह किलोमीटर प्रतिघंटा के बीच थी। अब यह रफ्तार लगभग दो गुना बढ़ी है। रविवार को पानीपत में हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 136 माइक्रो ग्राम घन मीटर तक पहुंच गई है। हवा में धुएं की मात्रा भी 100, कार्बन की मात्रा 34 माइक्रो ग्राम घन मीटर दर्ज की गई है। हवा में कार्बन की मात्रा भी लगातार कम हो रही है। अब हवा में सल्फर ऑक्साइड की मात्रा 08 व नाइट्रोजनऑक्साइड की मात्रा 31 माइक्रो ग्राम घन मीटर दर्ज की गई है।
पिछले चार दिन का एक्यूआई-
दिन- एक्यूआई
28 नवंबर- 169
29 नवंबर- 169
30 नवंबर- 147
एक दिसंबर- 136
पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि हवा की रफ्तार पहले के मुकाबले बढ़ी है। इससे स्मॉग की चादर टूटी है। अब धूल के कण व धुआं ऊपर उठ रहा है। पराली जलाने की घटनाएं भी बंद हो चुकी है। इसलिए एक्यूआई में सुधार हो रहा है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह सुधार और अधिक होगा।
वर्जन-
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ कुलदीप सिंह ने बताया कि एक्यूआई घट रहा है। ग्रैप चार का चौथा चरण लागू है। इनके अनुरूप काम किया जा रहा है। उद्योगों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। डीजी सेट के प्रयोग पर प्रतिबंध है। यह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आगामी निर्देशों तक जारी रहेगा।