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Panipat News: जैन भागवती दीक्षा लेकर हीरामणि बन गए अनुपम मुनि महाराज

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पानीपत। चातुर्मास शुरू होते ही जैन संत और सतियों ने विशेष ध्यान साधना शुरू कर दी है। गांधी मंडी जैन स्थानक में बुधवार को अनुपम मुनि महाराज ने मंगल प्रवेश किया। उनके साथ कथाकार अमित मुनि व अतिशय मुनि भी हैं। अनुपम मुनि महाराज का जीवन और जैन सन्यासी बनने की कहानी भी अलग ही है।
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अनुपम मुनि महाराज ने बताया कि उनका प्रारंभिक नाम हीरामणि पांडेय था। वे चमत्कारी संत प्रेम सुख महाराज के पड़पौत्र हैं। वे मूल रूप से नेपाल के गांव रामवास कपिलवस्तु लुंबिनी से हैं। उनका ब्राह्मण कुल है। पांचवीं कक्षा में उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम आने पर उनके पिता भरतमणि पांडेय उनको प्रेमसुख महाराज का आशीर्वाद दिलाने ले गए। उन्होंने यहां आईएएस बनने की अपनी इच्छा प्रकट की। तब मुनि महाराज ने फरमाया था कि इसको तो संत बनना है। यह इसकी इच्छा है कि सनातनी बने या जैन। स्थितियां ऐसी बनी कि इन पर जैन मुनि बनने का रंग चढ़ गया। लगभग सवा साल वैरागी रहे और 1993 में उदयपुर में जैन भागवती दीक्षा लेकर ज्योतिषाचार्य राजेश मुनि के परम शिष्य बनें। उनका पानीपत से रिश्ता यह है कि श्री एसएस जैन सभा (रजि.) गांधी मंडी के वरिष्ठ संरक्षक महावीर प्रसाद जैन का परिवार उनका का धर्म परिवार बना था और वे दोनों धर्म पिता हैं।
अनुपम मुनि महाराज ने बताया कि जैन संत रमते जोगी होते हैं। वे एक स्थान पर अधिक समय के लिए विशेष परिस्थितियों में ही रुकते हैं। वर्षा काल में जीवों की उत्पत्ति होती है। इसलिए वर्षा काल के चार महीने एक स्थान पर रुकते हैं ताकि जीव हिंसा से अधिकाधिक बचा जा सके। ऐसे में चातुर्मास वर्षा वास भी कहलाता है। इन चार महीने संत व सती महाराज स्वयं भी विशेष साधना करते हैं। अमित मुनि महाराज ने सामूहिक पंच परमेष्ठी णमोकार मंत्र का सामूहिक पाठ कराया। अतिशय मुनि ने एक मधुर भजन प्रस्तुत किया किया। इस अवसर पर महावीर प्रसाद जैन, प्रधान जगदीश जैन, महामंत्री डॉ. ईश्वर जैन, डाॅ. ईश्वर जैन, डाॅ.ए.पी.जैन, रामकिशन जैन, सुरेश जैन, संजय जैन, विजेंद्र जैन, राजेश जैन, सज्जन जैन उपस्थित रहे।
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अनुपम मुनि महाराज चमत्कारी संत प्रेम सुख महाराज के पड़पौत्र हैं। वे मूल रूप से नेपाल से हैं और ब्राह्मण कुल से हैं। पांचवीं कक्षा में उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम आने पर उनके पिता भरतमुनि पांडेय प्रेमसुख महाराज का आशीर्वाद दिलाने के लिए आए तो उन्होंने आईएएस बनने की अपनी इच्छा प्रकट की। तब मुनि महाराज ने फरमाया था कि इसने तो संत बनना है, यह इसकी इच्छा है कि सनातनी बने या जैन। स्थितियां ऐसी बनी कि इन पर जैन मुनि बनने का रंग चढ़ गया। लगभग सवा साल वैरागी रहे तथा 1993 में उदयपुर में जैन भागवती दीक्षा लेकर ज्योतिषाचार्य पूज्य श्री राजेश मुनि के परम शिष्य बने। उनका पानीपत से रिश्ता यह है कि श्री एसएस जैन सभा (रजि.) गांधी मंडी के वरिष्ठ संरक्षक महावीर प्रसाद जैन का परिवार उनका का धर्म परिवार बना था और वे दोनों धर्म पिता हैं।
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