पानीपत। गर्भवतियों की सेहत स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। तमाम प्रयास के बाद भी गर्भवतियों की सेहत में सुधार नहीं हो रहा है। जिले की 60 प्रतिशत गर्भवतियों में खून की कमी व 10 प्रतिशत गर्भवतियां उच्च रक्तचाप से ग्रस्त हैं। खून की कमी से डिलीवरी के दौरान महिलाओं की जान खतरे में रहती है।
पिछले दो साल में लगभग 25 महिलाओं की डिलीवरी के दौरान मौत हो चुकी है। खून की कमी से गर्भवतियां विभिन्न प्रकार की बीमारियों से घिर रही हैं जो सिजेरियन डिलीवरी का बड़ा कारण बन रहा है। 15 प्रतिशत नवजात सर्जरी से दुनिया में आंखें खोल रहे हैं। सोमवार को जिले के 27 स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत शिविर लगे। यहां 622 गर्भवतियों की जांच की गई। 57 गर्भवती हाई रिस्क डिलीवरी के दायरे में मिली। 32 डॉक्टरों ने गर्भवतियों की जांच कर उन्हें परामर्श दिए।
जांच शिविर में 10 प्रतिशत ऐसी गर्भवती मिलीं, जिनमें खून की मात्रा पांच प्रतिशत से भी कम थी। 50 प्रतिशत गर्भवतियों में पांच-दस ग्राम के बीच खून की मात्रा मिली। अधिकतर सर्जरी में रक्त चढ़ाकर सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ रही है। ये चिंताजनक आंकड़े हर माह की नौ तारीख को लगने वाले प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत शिविर में सामने आए हैं। डॉक्टरों के अनुसार खानपान के प्रति जागरूकता की कमी गर्भवतियों में खून की कमी का बड़ा कारण है।
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महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं- डॉ. बंसल
हर माह लगने वाले जांच शिविर में ये सामने आया है कि 60 प्रतिशत गर्भवतियों में खून की कमी व 20 प्रतिशत उच्च रक्तचाप से ग्रस्त हैं। गर्भवतियों को रक्त चढ़ाकर डिलीवरी करनी पड़ती है। खून की कमी से शरीर में विभिन्न प्रकार की बीमारी जन्म लेती है। खून की कमी डिलीवरी के दौरान महिला की मौत का कारण भी बनती है। महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं है, जबकि गर्भधारण के दौरान हेल्दी डाइट जरूरी होती है। महिलाएं आयरन की गोली भी नहीं लेती, इसलिए खून की कमी पूरी नहीं होती।
डॉ. लिपिका बंसल, गायनोकॉलोजिस्ट, जिला नागरिक अस्पताल