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Panipat News: तेजी से फैल रही एलोपेसिया बीमारी, वंशानुगत होने के साथ तनाव के कारण भी रही फैल

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जिला आयुष विभाग का होम्योपैथी कक्ष। संवाद
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पानीपत। आधुनिक की दौड़ में हर कोई एक दूसरे से आगे निकलने में लगा हुआ है। बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग भी तनाव और एलोपेसिया (सिर में धब्बे) की बीमारी होने लगी है। इसमें बीपी और शुगर के संकेत भी प्रारंभिक स्टेज में आ रहे हैं। पहले यह बीमारी कम देखने में आती थी। अब सप्ताह एक से दो मरीज इसके आ रहे हैं। चिकित्सक लोगों को तनाव मुक्त रहने और शुरुआती लक्षणों में ही जांच कराने का परामर्श दे रहे हैं।
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जिला आयुष विभाग के होम्योपैथी डॉ. सुदेश पाल ने बताया कि एलोपेसिया बीमारी में सिर के कुछ हिस्से पर सफेद धब्बा हो जाता है। फिर उस हिस्से के बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं। यह धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। यह बीमारी कई बार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में भी लग जाती है या यह कई बार ज्यादा तनाव लेने से भी हो जाती है। हर समय तनाव में रहने से यह बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।


पिता से बेटों में आई समस्या



शहर के एक व्यक्ति ने बताया कि उनके सिर पर खुजली होने के साथ सफेद धब्बा होने लगा था। यह पहले छोटा दिखता था लेकिन समय के साथ बढ़ता गया। धब्बा फैलता गया तो सिर के बाल झड़ने लगे। उन्होंने एलोपैथिक दवा ली। इसमें कोई आराम नहीं मिला। चिकित्सकों ने सर्जरी तक की सलाह दी। उन्होंने आयुर्वेद से इसका इलाज शुरू कराया। इसमें करीब एक साल का समय लगा। अब उनके दोनों बेटों में इसके लक्षण आने लगे हैं। इसलिए उन्होंने शुरुआती लक्षण दिखते ही दोनों का आयुर्वेदिक इलाज शुरू करवा दिया है।
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लोगों को शुरुआती लक्षण दिखते ही चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए और इसका इलाज पूरा करना चाहिए। आयुर्वेद में इलाज लंबा होता है। इसमें फायदा जरूर मिलता है।
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- डॉ. सुदेश पाल, होम्योपैथिक, जिला आयुष विभाग।
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