पानीपत। जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में राशन के नाम पर गड़बड़झालों का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब शहर के वार्ड 15 किशनपुरा में डिपोधारक की मौत के बाद भी उसके नामिनी की ओर से विभागीय निरीक्षक से मिलीभगत कर राशन वितरण का मामला उजागर हुआ है। जिसमें विभाग निदेशक ने डीएफएससी से एक सप्ताह में मामले की जांच कर रिपोर्ट तलब की है। डायरेक्टर की ओर से भेजे गए पत्राचार में स्पष्ट किया गया है कि जब निरीक्षक राजीव सैनी का स्थानांतरण हो चुका था तो एक बाद भी उनको रिलीव क्यों नहीं किया गया। इसके साथ स्टॉक तक की जांच रिपोर्ट भेजी जाए।
वार्ड 15 किशनपुरा के रहने वाले शिकायतकर्ता रवि ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के डायरेक्टर को भेजी शिकायत में बताया था कि वार्ड 15 किशनपुरा में सुरेंद्र कुमार के नाम से डिपो है। डिपोधारक की तीन माह पहले मौत हो चुकी है फिर भी उनका नामिनी धर्मेंद्र विभागीय निरीक्षक राजीव सैनी के साथ मिलीभगत कर डिपो चला राशन वितरण कर रहा है। इतना ही नहीं, बल्कि मृतक सुरेंद्र के बैंक खाते से पानीपत कान्फेड को राशन की राशि दी जा रही है। जोकि नियमों के विरुद्ध है। जब उसने शिकायत की तो विभागीय अधिकारियों ने अपने बचाव में पांच सितंबर को सप्लाई दूसरे डिपो को अटैच कर दी। जबकि डिपो पर राशन वितरण पुरानी जगह ही हो रहा है। उसने मामले और स्टाॅक की जांच की मांग की।
जिस पर निदेशालय ने संज्ञान लेकर डीएफएससी से जांच रिपोर्ट तलब की है। खाद्य एवं आपूर्ति निदेशक की ओर से डीएफएससी लिखा गया है कि निरीक्षक राजीव सैनी का तबादला दो अगस्त को हुआ था। निदेशक ने दस सितंबर को पत्राचार कर डीएफएससी से जवाब मांगा। इसके बाद फिर से निदेशक ने डीएफएससी को 16 सितंबर को लिखा कि डिपो धारक की पत्नी की ओर से भी विभाग को दस दिन पहले इसकी सूचना दी गई थी। बावजूद डिपो चलाया जाता रहा। जो नियमों का उल्लंघन है। विभाग द्वारा बचाव करते 5 सितंबर को डिपो की सप्लाई अटैच की गई। जबकि पिछले 7-8 साल से नॉमिनी का फिंगर प्रिंट तक नहीं लगा। पूरे प्रकरण की जांच समेत स्टॉक की जांच के साथ निदेशक ने डीएफएससी से सात दिन में रिपोर्ट मांगी है।
वर्जन :
डीएफएससी नीतू का कहना है कि मामले में शिकायत मिली थी। इसकी जांच डीएफएसओ को दी गई है। इंस्पेक्टर राजीव सैनी को रिलीव कर दिया गया है। जांच में स्टॉक की भी जांच होगी। जिसमें अगर कोई दोषी मिला तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।