पानीपत । विधानसभा चुनाव की गणना के दौरान पानीपत शहरी विधानसभा में ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी वरिंदर शाह के एजेंट ने इसकी लिखित शिकायत दी है। एआईसीसी से विशेषज्ञ गीता और वरिंदर शाह पहुंचे। ईवीएम की क्षमता 99 प्रतिशत रहने पाने पर कांग्रेस के एंजेटों के विरोध जताया था।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीसी डाॅ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने बताया कि विरोध बेबुनियादी और सत्य से परे है। ईवीएम निर्माता कंपनी ने इस मशीन की फिटिंग ही ऐसे की है। इस मशीन में कई तकनीकी पहलू हैं। ईवीएम के कंट्रोल यूनिट में अल्कालाइन बैटरी का उपयोग होता है। कंट्रोल यूनिट में नई बैटरी कमिशनिंग के दिन उम्मीदवारों की उपस्थिति में डालकर सील की जाती है और पानीपत शहरी विधानसभा क्षेत्र में भी सभी की उपस्थिति में कमीशनिग की गई थी। उस समय सभी ने संतुष्टि जाहिर की थी, अब एंजेटों या उम्मीदवार द्वारा विरोध करना सरासर गलत है।
ईवीएम की तकनीकी बारीकियों से बताया कि विधानसभा में लगी ईवीएम प्रारंभ में बैटरी 7.5 से 8 के बीच वोल्टेज उपलब्ध करवाती है। इसीलिए वोल्टेज के 7.4 के ऊपर रहने पर बैटरी की क्षमता 99 प्रतिशत प्रदर्शित की जाती है। उपयोग के साथ बैटरी की क्षमता और परिणाम स्वरूप वोल्टेज कम होती है। जैसे ही वोल्टेज 7.4 से कम होती जाती है तो बैटरी की क्षमता 98 से 10 प्रतिशत के बीच प्रदर्शित की जाती है। बैटरी में 5.8 से अधिक वॉल्ट (10 प्रतिशत क्षमता के अधिक) रहने पर कंट्रोल यूनिट कार्यरत रहती है। वोल्टेज 5.8 (10 प्रतिशत के बराबर) होने पर बैटरी बदलने का संकेत कंट्रोल यूनिट के डिस्प्ले पर आता है। ये बिलकुल वैसा ही है, जैसे रिजर्व फ्यूल में आने पर वाहन में संकेत आता है। सामान्यतः अल्कालाइन बैटरी का ये गुण होता है की इसे स्विच ऑफ रखने पर इसकी वोल्टेज को स्वयं कुछ हद तक पुनः बढ़ाने (regain voltage) की क्षमता होती है।पर इसकी वोल्टेज को स्वयं कुछ हद तक पुनः बढ़ाने (regain voltage) की क्षमता होती है। डीसी ने विरोध कर्ताओ को सभी तथ्यों से अवगत करवाने बाद उसकी शिकायत को सिरे से नकार दिया और कहा कि समाज की बेहतरी के लिए सभी को नकारात्मक नहीं सकारात्मक सोच बनानी चाहिए।