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Panipat News: निगम में शामिल होने से पहले कई कसोटियों से गुजरना होगा एल्डिको, टीडीआई और सेक्टरों को

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पानीपत। एल्डिको समेत सेक्टर 18, 24, 38, 39 40 को निगम में शामिल करना अधिकारियों के लिए इतना भी आसान नहीं है। एक निर्धारित प्रक्रिया के अधीन तय मापदंड पूरे करने के बाद ही इनको निगम में शामिल किया जा सकता है। हालांकि निगम अधिकारी सभी सेक्टरों, एल्डिको, टीडीआई के समीप सेक्टरों के निर्धारित मानक पूरे करने में जुटे हैं। सबसे ज्यादा मुश्किल रिहायशी मकान विकसित करने वाली एजेंसिंयों के सामने आ सकती है। चूंकि अंसल और टीडीआई जैसे कंपनियों पर पहले ही करोड़ों रुपये का जुर्माना है। वहीं, लोगों की मूलभूत सुविधाओं के लिए निर्धारित नियम भी पूरे नहीं किए गए हैं। निगम में शामिल होने से पहले इनको अपने बकाया जुर्माने का भुगतान भी करना होगा और वहां रहने वाले लोगों की मूलभूत सुविधाओं के लिए वादे किए गए प्रोजेक्ट की राशि भी निगम को जमा करानी होगी। ताकि निगम उस राशि से वहां के लोगाें को वे प्रोजेक्ट बनाकर सुविधाएं दे सके।
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इसमें जनसंख्या के हिसाब से निगम में शामिल होने वाला एरिया 15 हजार की आबादी से कम और 50 हजार की आबादी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। एक वर्ग किलोमीटर में कम से कम 400 लोगों की आबादी का घनत्व होना चाहिए। 60 प्रतिशत से ज्यादा आबादी गैर कृषि गतिविधियों से जुड़ी होनी चाहिए। अगर ग्राम पंचायत का एरिया निगम सीमा में शामिल करना है तो ग्राम पंचायत को प्रस्ताव पारित कर निगम को देना होगा। इसके अलावा गांव की संपत्ति, आबादी के ब्योरों के साथ ग्राम पंचायत की लेनदारी और देनदारी का ब्योरा तक निगम को देना होगा। अगर किसी डेवलपर कंपनी में लोग रहते हैं तो कंपनी को हर संबंधित विभाग से एनओसी लेकर निगम को देनी होगी। जो मूलभूत सुविधाएं कंपनी ने अपने लेआउट प्लान में दी होंगी और उन्हें पूरा नहीं किया होगा तो उनका बजट भी निगम को जमा करवाना होगा। इसके बाद निगम प्रस्ताव बनाकर मंडलायुक्त के मार्फत सरकार को भेजेगा। तब संबंधित एरियाको निगम में शामिल करने की मंजूरी मिल सकती है।

गौरतलब है कि बाबरपुर मंडी के सामने एल्डिको इस्टेट, एल्डिको इस्टेट के पास ही मौजूद सेक्टर 40, एचएसवीपी के सेक्टर 18 का बचा हुआ एरिया, एचएसवीपी के सेक्टर 24 के नजदीक टीडीआई सिटी और सेक्टर 38 व 39 के एरिया को अब निगम में शामिल करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। अब तक इन एरिया के लोगों का कोई निर्धारित आसरा ही नहीं था। एचएसवीपी में होने के बाद भी ये लोग एचएसवीपी की दी जाने वाली सुविधाओं से वंचित थे। इनमें से कुछ एरिया न तो पंचायत के अधीन था, न एचएसवीपी के और न ही निगम के। इन लोगों को अपने प्रमाण पत्र तक बनवाने के लिए विभागों के चक्कर काटने पड़ रहे थे। अगर ये एरिया निगम में शामिल होता है तो लाखों लोगों को निगम की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
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वर्जन:
किसी भी एरिया को निगम में शामिल करने की सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया होती है। इसमें कई पैमाने और मापदंड होते हैं। इनके अनुसार ही काम कराया जा रहा है।
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दीपक राणा, एटीपी, नगर निगम।
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