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Panipat News: बाॅस्केटबॉल खिलाड़ियों की जननी बना अहर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेर रहे खिलाड़ी

Sat, 30 May 2026 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
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अंकुश खैंची।
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कुलदीप आर्य
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अहर (इसराना)। अहर गांव की पहचान अब केवल एक गांव के रूप में नहीं, बल्कि बास्केटबॉल की नर्सरी के तौर पर होती है। कबड्डी के कई खिलाड़ी नाम कमा रहे हैं। यहां के खिलाड़ी न सिर्फ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि शिक्षा और सरकारी सेवाओं में भी गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।

गांव के युवाओं ने जहां बास्केटबॉल और कबड्डी में देशभर में पहचान बनाई है, वहीं बेटियां हैंडबॉल में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची हैं। खेलों के जरिए ही गांव के करीब 60 युवा प्रदेश और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में उच्च पदों पर चयनित हो चुके हैं।
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शिक्षा के क्षेत्र में भी गांव का सरकारी स्कूल मेरिट मशीन के नाम से जाना जाता है, जहां से कई विद्यार्थी आईएएस और एचसीएस अधिकारी बने हैं। करीब 1500 युवा विदेशों में भी गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।

ग्रामीण रामपाल सिंह ने बताया कि गांव में बास्केटबॉल की शुरुआत 1968 में सेवाराम डीपीई ने की थी। इसके बाद पीटीआई मंगतराम ने करीब दो दशक तक खेल को आगे बढ़ाया। शुरुआती दौर में ही गांव के 10 खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।



गांव के दीपक कोच ने बताया कि मास्टर भीम सिंह मलिक के पुत्र अनिल मलिक और अशोक मलिक आईएएस बने हैं। सुशील खैंची एचसीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में अंबाला में परिवहन विभाग में कार्यरत हैं। इससे पहले रणधीर सिंह भी एचसीएस अधिकारी रहे हैं। वे अखिल भारतीय रोड़ महासभा के प्रधान भी रहे हैं।



खेलों के जरिए कई युवा विभिन्न सेवाओं में पहुंचे हैं। रामचंद्र खैंची दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए, जबकि जयपाल सिंह बीएसएफ में सेवाएं दे चुके हैं। वेदप्रकाश साईं कोच रहे हैं। इसके अलावा दलीप सिंह, अतर सिंह, चांदराम, कृष्ण दत्त, रणजीत कटारिया और सुलतान जैसे खिलाड़ियों ने भी खेल जगत में पहचान बनाई।



गांव के सचिन खैंची एमबीबीएस के बाद सेना में कैप्टन बने, जबकि सत्यवान बीएसएफ में डीआईजी पद पर कार्यरत हैं। दलीप आईबी में इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। महेंद्र रेलवे में गुवाहाटी नॉर्थ जोन के निदेशक रहे हैं। राजेंद्र सिंह नहरी विभाग में चीफ इंजीनियर और रणवीर कटारिया बिजली निगम में एक्सईएन रहे हैं। यशपाल और हवासिंह एसडीओ पद पर कार्यरत हैं, जबकि बलिंदर भेल और संदीप आईओसीएल में फील्ड ऑफिसर हैं।



हमारे गांव के करीब 200 युवा नेशनल स्तर तक खेल चुके हैं और करीब 60 लोगों को बड़ी नौकरियां मिली हैं। 1998 से 2006 के बीच खेल का स्तर थोड़ा नीचे आ गया था, लेकिन इसके बाद मस्तु और अनूप ने मिलकर बॉस्केटबॉल को दोबारा शुरू किया। हमारे गांव की तीन लड़कियां काफी, विजेता और मीरु इंडिया कैंप तक खेल चुकी हैं। - दीपक कोच



मैंने अपने गांव में ही बॉस्केटबॉल का अभ्यास शुरू किया था। 2016 में मैंने ईरान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेला और इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। हमारे गांव से तनुज, दीपक, साहिल, विकास, मस्तु, सावन और सुनील जैसे खिलाड़ी इंडिया कैंप तक पहुंचे हैं। -दीपक खैंची



मुझे बॉस्केटबॉल खेल में शुरू से ही बहुत जुनून रहा। मैं सुबह उठते ही मैदान पर पहुंच जाता था और शाम तक वहीं अभ्यास करता था। मैं तीन बार इंडिया टीम में खेल चुका हूं और तीनों बार लविश के साथ खेलने का मौका मिला। अब मैं नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का काम कर रहा हूं। -अंकुश खैंची


बॉस्केटबॉल खेल में मुझे अलग ही आनंद आता है। मैं 30 बार नेशनल खेल चुका हूं और इस दौरान 6–7 बार सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी रहा हूं। मैं 2019 में भारतीय बॉस्केटबॉल टीम का कप्तान रहा हूं। वर्तमान में मैं राजपूताना राइफल में तैनात हूं और सीनियर भारतीय टीम में खेल रहा हूं। -साहिल टाया


मैंने अपने गांव से ही बॉस्केटबॉल खेल की शुरुआत की थी। मैं सात बार भारतीय टीम में खेल चुका हूं और चार बार कप्तान भी रहा हूं। वर्तमान में मैं ऑस्ट्रेलिया में स्पोर्ट्स कोटे से नौकरी कर रहा हूं और गांव में खेल प्रतिभाओं को निखारने में अपना पूरा योगदान दे रहा हूं। -लविश खैंची
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हैंडबॉल में रामपाल के नेतृत्व में लड़कियां लगातार अभ्यास कर रही हैं। हमारे गांव की 15–16 लड़कियां मेडल जीत चुकी हैं। काजल और नेहा एनआईएस कोच हैं। मोनिका, काजल, नेहा, सपना, नेहा-2, तमन्ना, मनु और सलोनी जैसी खिलाड़ी विभिन्न पदों पर हैं। पानीपत जिले की टीम में अधिकतर खिलाड़ी हमारे अहर गांव से होती हैं। -देवेंद्र सैन

अंकुश खैंची।

अंकुश खैंची।

अंकुश खैंची।

अंकुश खैंची।

अंकुश खैंची।

अंकुश खैंची।

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