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Panipat News: आढ़त और जीएसटी समेत कई मांगों लेकर आज से पांच दिन हड़ताल पर आढ़ती

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पानीपत। अनाज मंडी के आढ़ती सोमवार को गेहूं सीजन के पहले दिन ही पांच दिन की हड़ताल पर चले जाएंगे। आढ़तियों ने मांगों को न मानने पर संघर्ष तेज करने की भी चेतावनी दी है। इसका फैसला राज्य कार्यकारिणी की 28 मार्च को कुरुक्षेत्र में आयोजित बैठक में लिया गया था। जिसकी अध्यक्षता प्रदेशाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने की थी।
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पानीपत अनाज मंडी एसोसिएशन के जिला प्रधान धर्मबीर मलिक ने बताया कि आढ़ती लंबे समय से सरकार के सामने अपनी मांगों को रख रहे हैं, लेकिन उनको हर बार आश्वासन देकर टाल दिया जाता है। आढ़ती एसोसिएशन एक से पांच अप्रैल को हड़ताल पर रहेंगे। उनकी मांगों को अनदेखा किया जाता है तो वे आगामी संघर्ष को तैयार रहेंगे।
ये हैं प्रमुख मांग
- किसानों की कॉटन, सरसों, सूरजमुखी व बाजरा समेज सभी फसल सरकार द्वारा एमएसपी पर आढ़तियों के माध्यम से खरीदी जाएं। आढ़त पूरी 2.5 प्रतिशत मिलनी चाहिए। यह गेहूं पर 53.125 व धान पर 55.075 रुपये बनती है। जबकि पिछले चार वर्षों से गेहूं पर 46 और धान पर 45.88 रुपये दी जा रही है।
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-पिछले चार वर्षों से एमएसपी का भुगतान सीधे किसानों को दिया जाने लगा है l इससे आढ़तियों के साथ किसानों में भी रोष है। सरकार खरीदी सभी फसलों का भुगतान किसान की सहमति अनुसार आढ़ती या किसान के स्वयं के खाते में अदा करें।
-धान सीजन 2019 में खरीद एजेंसियों द्वारा छह महीने देरी से भुगतान किया गया था। मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद भी देरी से भुगतान का ब्याज अभी तक मंडियों में नहीं दिया गया है l
-इनकम टैक्स विभाग ने कच्चे आढ़तियों के टीडीएस रिफंड को रोक दिया है। क्योंकि कच्चे आढ़ती की सेल को लेकर इनकम टैक्स विभाग या उनके सॉफ्टवेयर में भ्रम है। कच्चे आढ़ती की पूरे आई फॉर्म की वैल्यू कच्ची आढ़ती की सेल मान रहे हैं। जबकि वास्तव में एपीएमसी मंडियों में फसल सेल करने वाला किसान है। उस फसल को खरीदने वाला पक्का आढ़ती या मिलर है। कच्चे आढ़ती की पूरी सेल के कमीशन पर नियम अनुसार टीडीएस काटा जाना चाहिए l
-जीएसटी डिपार्मेंट ने पांच करोड़ से ऊपर सालाना सेल वाले व्यापारियों के लिए जरूरी कर दी है। इसमें भी उपरोक्त की तरह कच्चे आढ़ती की सेल केवल उसकी कमीशन है।यह इनवाइस वाला कानून कच्चे आढ़ती के ऊपर लागू नहीं होता है l
-पानीपत समेत प्रदेश की मंडियों में जीएसटी फर्स्ट सेल पर है, जबकि पंजाब में जीएसटी फर्स्ट परचेज पर लागू है। ऐसे में पंजाब के कच्चे आढ़तियों को जीएसटी नंबर लेने की जरूरत नहीं है l वहां खरीदार ही जीएसटी भरता है। जबकि प्रदेश में इसके उलट कच्चा आढ़ती जीएसटी भर रहा है।

-मंडियों से एफसीआई की खरीदी गेहूं सीधी साइलो में गई है। इस बार उस गेहूं की खरीद पर एफसीआई ने ढांड मंडी जिला कैथल के आढ़तियों को आढ़त 50 प्रतिशत दी हैl जबकि पिछले कई वर्षों से यह आढ़त संबंधित आढ़तियों को पूरी दी जा रही है।
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