पानीपत। सेक्टर-29 पार्ट-2 में सीईटीपी प्लांट के सामने धंसी जमीन को अब तक निगम अधिकारी दुरुस्त नहीं पाए थे कि इससे करीब 500 मीटर पहले शहर की ओर दूसरा गहरा गड्ढा बन गया है। यहां भी करीब दस फुट चौड़ी और सात फुट गहराई तक फिर जमीन धंस गई है। इसने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, शहर की सीवरेज निकासी पर भी संकट के बादल छा गए हैं। फिर से नगर निगम, एचएसवीपी के साथ बिजली निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
सोमवार दोपहर से लेकर मंगलवार शाम तक अधिकारियों ने पूरी पाइपलाइन का दौरा करने पर मालूम हुआ कि ये लाइन 27 से 58 साल पुरानी है। जो अब खस्ताहाल हो चुकी है। इसी वजह से ये लाइन अब टूटना शुरू हो चुकी है। छह फुट की इस लाइन से लगातार शहर की निकासी का पानी एसटीपी तक पहुंचाया जा रहा है। जिसे बंद तक नहीं किया जा सकता। अब अधिकारी इस चलती लाइन को अमेरिकन तकनीक से जोड़ने का काम करने की योजना बना रहे हैं। दूसरी ओर, जिन फैक्टरियों का केमिकल युक्त पानी इस लाइन या सीवरेज मेनहोल में अवैध कनेक्शन कर चोरी से छोड़ा जा रहा था, उन पर कार्रवाई होगी।
अधिकारियों की पड़ताल में सामने आया है कि सीवरेज निकासी की ये लाइन संजय चौक से लेकर करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी बबैल नाके तक जनस्वास्थ्य विभाग ने 1965 में बिछाई थी। ये लाइन आज 58 साल पुरानी हो चुकी है। वहीं, विभाग ने 1996 में बबैल नाके से लेकर एसटीपी तक लाइन बिछाई थी। ये लाइन अब 27 साल पुरानी हो चुकी है, जिसकी लंबाई करीब 10 किलोमीटर लंबी बताई जा रही है। इसी लाइन के जरिये शहर की सीवरेज की निकासी सालों से होती आ रही है। इसी लाइन में कई डाई हाउसों ने केमिकल का पानी छोड़ा था। जिसकी वजह से लाइन ध्वस्त होना शुरू हो चुकी है।
शहर की पूरी सीवरेज सिस्टम की निकासी इसी पाइपलाइन से होकर निगम के सिवाह स्थित 25 और 35 एमएलडी एसटीपी पर जाती है। इससे हर घंटे लाखों लीटर पानी को बड़ी मोटरों से लिफ्ट कराया जाता है। छह फुट की कंक्रीट की ये लाइन अगर ज्यादा डैमेज हुई तो नुकसान ओर भी ज्यादा होने की संभावना बन जाएगी। अभी तक अधिकारियों को भी भूमिगत इस लाइन के खस्ताहाल होने और प्वाइंटों की जांच का सही अनुमान नहीं है कि लाइन कहां से कहां से जमीन के अंदर खस्ताहाल हो चुकी है।
मंगलवार सुबह अधिकारी मौके पर पहुंचे। पड़ताल शुरू करने के लिए पोकलेन और जेसीबी मशीनें मंगवाई। आसपास की मिट्टी को हटाया गया। खतरा टलने पर कर्मचारियों और अधिकारी ने गहरे गड्ढे में उतरकर जांच की तो पता चला कि यहां मेनहोल नहीं है। यहां सिर्फ लाइन टूटने से लीकेज का पता चल सका। पूरा दिन यहां काम चलता रहा। तभी सूचना मिली कि इस गड्ढे से 500 मीटर पहले फिर जमीन धंस गई है। जिसने अधिकारियों समेत आसपास के लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है।
अधिकारियों ने बताया कि लाइन काफी खस्ताहाल थी। इसलिए टूट रही है। ऐसा पहले भी प्रदेश के कई जिलों, जिनमें रोहतक व रेवाड़ी में हुआ है। लाइन को बंद नहीं किया जा सकता। अब इसे अमेरिकन तकनीक जिसे सीआईपीपी कहते हैं के माध्यम से लाइन के अंदर दूसरे लाइन डाली जा सकती है। ये अच्छा विकल्प है, ताकि पानी का बहाव रुके बिना दूसरी लाइन का काम पूरा कर लिया जाए। हालांकि अभी तक इस तकनीक पर फैसला नहीं लिया जा सका है।
सोमवार दोपहर बाद सेक्टर 29 पार्ट 2 में सीआईटीपी के सामने नगर निगम के सीवरेज लाइन के मेनहोल जमीन में धंसने की सूचना मिली। मौके पर अधिकारी पहुंचे तो यहां करीब 50 फुट चौड़ा और 20 फुट गहरा गड्ढा बन चुका था। अधिकारी देर रात तक लाइन चालू रखने के साथ इस घटना का निरीक्षण करने और असल कारणों का पता लगाने में जुटे रहे। मंगलवार को खुदाई करवाई तो दूसरी जगह से जमीन धंस गई।
अधिकारियों का कहना है कि अगर बारिश होती है तो उनके सामने चुनौती और बढ़ी हो जाएगी। मंगलवार को भी बूंदाबांदी ने उनकी धड़कनें बढ़ा दी थी। एक ओर भूमि कटाव और जमीन धंसने से हादसे का डर है, दूसरी ओर शहर की निकासी की लाइन को भी चालू रखना है। खस्ताहाल लाइन कहां-कहां से डैमेज है ये भी पता लगाना है। डेड हो चुकी लाइन की रिपेयरिंग भी करवानी है।
अवैध कनेक्शन वालों पर होगी कार्रवाई : निगम
सीवरेज की इस लाइन में जिन फैक्टरी संचालकों ने मेनहोल या लाइन में अवैध कनेक्शन कर रखें हैं उन पर कार्रवाई होगी। इसके लिए निगम टीम पूरी लाइन के साथ सभी मेनहोल का निरीक्षण कर रही है। दूसरी ओर, लाइन चालू रखने के साथ मरम्मत पर काम किया जा रहा है।
- राजेश कौशिक, एक्सईएन, नगर निगम।