अपने लड्डू गोपाल के साथ कविता। स्रोत : स्वयं
हमारे घर के आसपास कई महिलाओं के पास लड्डू गोपाल थे। हमारा भी लड्डू गोपाल लाने का मन करता था। शौभाग्य से वह दिन 19 अगस्त 2020 को आया। जब कान्हा ने घर में प्रवेश किया। उस दिन से घर में खुशियां दोगुना हो गईं। बच्चों या परिवार में किसी को भी दिक्कत या परेशानी हो तो लड्डू गोपाल के सामने मन की बात कह देते हैं। वह समस्या खुद खत्म हो जाती है।
श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं। वे दूसरों में खुशियां लाने के लिए हंसते हैं। ऐसे ही हमारे लड्डू गोपाल हैं। हमारे घर पर चार नंबर के लड्डू गोपाल हैं। हम इनको अपने भगवान के रूप मानते हैं। इनको प्रात: काल उठाकर स्नान करा मंदिर में आसन पर बैठाते हैं। पूजा पाठ कर भोग लगाते हैं। सुबह परिवार के सदस्यों से पहले इनका खाना बनाते हैं। इनको खाने का भोग लगाने के बाद स्वयं खाते हैं। इसी तरह दोपहर को खाना खिलाते हैं। शाम चार बजे दूध और फल का भोग लगाते हैं। मेरी बेटी वर्षा या मैं रात को भोग लगाकर उन्हें सुला देते हैं।
प्रस्तुति : कविता जावला, दत्ता कॉलोनी